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हर किसी को खुश करने की जरूरत नहीं! कृष्ण की ये सीख बताएगी कब और क्यों कहें ‘ना’

कई बार हम झगड़े, रिजेक्शन या लोगों की बातों के डर से उन कामों के लिए भी ‘हां’ कह देते हैं, जिन्हें हम करना नहीं चाहते। बाहर से हम खुश दिखते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर थकान और स्ट्रेस महसूस करते हैं। गीता की सीख कहती है कि कोई भी फैसला डर की वजह से नहीं, बल्कि सोच-समझकर लेना चाहिए। दूसरों की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन हर किसी की हर बात मानना जरूरी नहीं है। अपनी खुशी और मन की शांति के लिए जरूरत पड़ने पर सही जगह ‘ना’ कहना भी सीखना चाहिए।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 01, 2026 पर 12:13 PM
हर किसी को खुश करने की जरूरत नहीं! कृष्ण की ये सीख बताएगी कब और क्यों कहें ‘ना’

कई बार हम दूसरों को खुश रखने के चक्कर में अपनी पसंद और जरूरतों को पीछे कर देते हैं। सामने वाला नाराज न हो जाए, रिश्ता खराब न हो जाए या लोग हमारे बारे में गलत न सोचें, इसी डर से हम उन बातों के लिए भी ‘हां’ कह देते हैं, जिन्हें हम असल में नहीं करना चाहते। शुरुआत में यह आसान लगता है, लेकिन बार-बार ऐसा करने पर मन में प्रेशर बढ़ने लगता है। हम बाहर से मुस्कुराते रहते हैं, लेकिन अंदर से थकान, परेशानी और बेचैनी महसूस कर सकते हैं।

जीवन में सही फैसला लेने की सीख हमें भगवद गीता सिखाती है डर या लोगों की बातों में आकर फैसला नहीं लेना चाहिए। अपने जहां किसी काम के लिए हां कहना आपके मन की शांति छीन रहा हो, वहां सोच-समझकर ‘ना’ कहना गलत नहीं है। अपनी लिमिट को समझकर बिना डर के फैसला लेने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है।

 

 

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