चावल भारत में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले अनाजों में से एक है और लगभग हर घर में इसे रोज पकाया जाता है। चावल से पुलाव से लेकर बिरयानी तक कई तरीकों से बनाया जाता है। चावल एक ग्लूटेन-मुक्त अनाज है जो आसानी से डाइजेस्ट होता है और पेट पर हल्का रहता है। इसमें विटामिन बी, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं। यह एनर्जी देने का अच्छा सोर्स माना जाता है। ब्राउन और लाल चावल में फाइबर ज्यादा होता है, जो पाचन और दिल की सेहत के लिए अच्छा है। चावल को सब्जियों या दालों के साथ खाया जाए तो यह और भी पौष्टिक बनता है। लेकिन डायबिटिज के मरीजों को इसे सीमित मात्रा में खाना चाहिए।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चावल से ज्यादा पोषण पाने के लिए उसे पकाने का सही तरीका क्या है? इसको सही तरह से पकाने को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। आइए जानते हैं चावल को कैसे पकाना चाहिए और इसमें किन-किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
न्यूट्रिशनिस्ट अमिता गद्रे ने फेसबुक पर वीडियो पोस्ट कर चावल पकाने के कुछ खास तरीकों की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उबालकर पानी निकालना, अवशोषण विधि और 'पार-बॉयलिंग व रिफ्रेशिंग वॉटर' तकनीक से आर्सेनिक की मात्रा घटाई जा सकती है। इसके अलावा, पका हुआ चावल रातभर फ्रिज में रखने से उसमें रेजिस्टेंट स्टार्च बढ़ता है, जिससे थोड़ी कैलोरी कम हो जाती है। हालांकि, इन तरीकों से केवल 15-20% कैलोरी ही कम होती है क्योंकि यह स्टार्च शरीर में नहीं पचता। चावल पकाने की यह नई विधि अपनानी चाहिए क्योंकि इससे चावल में मौजूद हानिकारक आर्सेनिक की मात्रा करीब 50% तक कम हो सकती है। चावल में आर्सेनिक ज्यादा जमा होता है, जो सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
चावल पकाने से ज्यादा जरूरी है कि आप कितनी मात्रा में खाते हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि अब चावल खाना छोड़ देना चाहिए या यह जहरीला हो गया है। इसलिए जरूरी यह है कि चावल कितनी मात्रा में खाया जा रहा है, उस पर ध्यान दिया जाए। चाहे आप कोई भी तरह का चावल खा रहे हों।