झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बीजेपी के 'संकल्प पत्र' को 'झूट, लूट और ठग पत्र' बताया है। उसने दावा किया कि बीजेपी ने विधानसभा चुनावों के नतीजे आने से 20 दिन पहले ही अपनी हार मान ली है। जेएमएम के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में लाभार्थियों को हेमंत सोरेन सरकार की मैया सम्मान योजना के तहत 2,500 रुपये मिलेंगे, जबकि बीजेपी की गोगो दीदी स्कीम के तहत 2,100 रुपये मिलेंगे।
शाह को 2 करोड़ नौकरियों का हिसाब देना चाहिए
BJP ने 3 नवंबर को अपना संकल्प पत्र पेश किया। भट्टाचार्य ने बीजेपी पर रोजगार के मौकों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री झारखंड में 5 लाख नौकरियों का हिसाब मांग रहे हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। शाह को यह बताना चाहिए कि क्या उन्होंने 11 सालों में 22 करोड़ नौकरियों के मौके पैदा किए हैं। 22 करोड़ तो छोड़ दीजिए, सिर्फ 2 करोड़ नौकिरयों का हिसाब दे दीजिए।
जेएमएम सरकार पहले ही आरक्षण के लिए बिल पास कर चुकी है
JMM के प्रवक्ता ने कहा कि बीजेपी के घोषणापत्र में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण का वादा किया गया है। कहा गया है कि दूसरे वर्गों को किसी तरह के नुकसान के बगैर सरकार यह आरक्षण देगी। उन्होंने कहा कि हम पहले ही ST के लिए 28 फीसदी आरक्षण, SC के लिए 26 फीसदी आरक्षण और ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण का बिल पारित कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबु लाल मरांडी ने ओबीसी कोटा को 27 फीसदी से घटाकर 14 फीसदी कर दिया था।
राज्य में दोबारा बनेगी जेएमएम की सरकार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने बीजेपी के संकल्प पत्र को फ्रॉड पत्र कहा। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि बीजेपी के संकल्प पत्र का मकसद लोगों के साथ धोखा करना है। सीनियर कांग्रेस लीडर राजेश ठाकुर ने कहा, "झारखंड के लोग सतर्क हो गए हैं। वे झूठे वादों के जाल में फंसने वाले नहीं हैं। मौजूदा गठबंधन अपने काम की बदौलत दोबारा राज्य की सत्ता में लौटेगा।"
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शाह को संविधान की समझ नहीं
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 3 नवंबर को राज्य में घुसपैठ के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जिम्मेदार बताया। इसके जवाब में ठाकुर ने कहा कि उन्हें (शाह) संविधान की अच्छी समझ नहीं है। सीमा की सुरक्षा केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। इस घुसपैठ के लिए वह जिम्मेदार हैं। उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने आश्वस्त किया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के दायरे में आदिवासी समुदाय नहीं आएगा। झारखंड में विरोध के बाद उन्हें यह फैसला लेना पड़ा।