MP Election: मजेदार है चाचौड़ा सीट की राजनीति, यहां से जीतने के बाद दिग्विजय बने मुख्यमंत्री, अभी भाई हैं विधायक, अब BJP में बगावत
MP Election 2023: इस सीट का इतिहास भी खुद में खास है, क्योंकि इसी सीट को जीतन के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। वर्तनमान में उनके भाई लक्ष्मण सिंह इस सीट से विधायक है। दूसरी तरफ इसी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के अंदर बगावत भी खुल कर सामने आ रही है। आज इन तीनों ही राजनीतिक मु्द्दों के जरिए चौचाड़ विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानते हैं
MP Election: मजेदार है चौचाड़ा सीट की राजनीति, यहां से जीतने के बाद दिग्विजय बने मुख्यमंत्री, अभी भाई हैं विधायक
MP Election 2023:मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (MP Assembly Election) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए इस बार अपनी रणनीति में कई बड़े बदलाव किए हैं। पार्टी ने जहां कई सीटों पर केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को उतारा है, तो कई सीटों पर मौजूदा चेहरे भी बदल दिए हैं। हालांकि, इस फैसले से कई जगहों पर पार्टी को बगावत का सामना भी करना पड़ रहा है। ऐसी ही एक विधानसभा सीट है चाचौड़ा (Chachoda Assembly Seat), जो लगातार चर्चाओं में बनी है। इस सीट पर नौ बार कांग्रेस (Congress) का और तीन बार BJP का कब्जा रहा है।
इस सीट का इतिहास भी खुद में खास है, क्योंकि इसी सीट को जीतन के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। वर्तनमान में उनके भाई लक्ष्मण सिंह इस सीट से विधायक है। दूसरी तरफ इसी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के अंदर बगावत भी खुल कर सामने आ रही है। आज इन तीनों ही राजनीतिक मु्द्दों के जरिए चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानते हैं।
जब दिग्विजय ने लड़ा उपचुनाव बने मुख्यमंत्री
चाचौड़ा विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़कर ही दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। दिग्विजय सिंह के लिए तत्कालीन कांग्रेस विधायक शिवनारायण मीणा ने 1994 में इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। अब ये सीट दिग्विजय सिंह के लिए भी प्रतिष्ठा का विषय बन गई है, क्योंकि यहां से राजपरिवार के सदस्य कभी चुनाव नहीं हारे।
ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के भाई लक्ष्मण सिंह यहां से मौजूदा विधायक हैं। पिछले कुछ दिनों से दिग्विजय यहां जोरदार प्रचार भी कर रहे हैं।
वैसे तो कांग्रेस ने चाचौड़ा विधानसभा सीट के लिए फिलहाल किसी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, लेकिन कयास यही लगाए जा रहे हैं कि एक बार फिर पार्टी लक्ष्मण सिंह पर ही भरोसा जता सकती है।
वहीं शिवनारायण मीणा अकेले ऐसे नेता हैं, जो चाचौड़ा सीट से चार बार विधयक चुने गए हैं। 1993, 1998, 2003, 2008 में मीणा ने कांग्रेस के टिकट पर इस सीट को जीता। उन्होंने लगातार तीन बार जीत कर इस सीट पर जीत की हैट्रिक भी लगाई है।
इस बार चाचौड़ा सीट पर BJP में बगावत
भारतीय जनता पार्टी को इस बार चाचौड़ा सीट को कांग्रेस से छीनना चाहती है। इसलिए बीजेपी ने इस बार यहां से अपना उम्मीदवार बदलने का फैसला किया। पार्टी ने अपनी पूर्व विधायक ममता मीणा का टिकट दिया। उनकी जगह प्रियंका मीणा को मैदान में उतारा है।
इस फैसले के बाद से ही इस सीट पर पार्टी में बगावत के स्वर उठने लगे। टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी की पूर्व विधायक ममता मीणा ने बगावत कर दी। ममता ने अब आम आदमी पार्टी (AAP) से टिकट लाकर BJP को चुनौती पेश कर दी है। इसके चलते इस सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है।
जानकारों का मानना है कि ममता मीणा के चुनाव मैदान में उतरने से अब प्रियंका मीणा का वोट कट सकता है और जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को होगा।
इसमें एक बड़ी बात ये भी है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को चाचौड़ा विधानसभा प्रभारी बनाया है, जो खुद भी इस बार दिमनी से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। अब अगर नरेंद्र सिंह तोमर चाचौड़ा सीट को बीजेपी की झोली में डालते हैं, तो उनका कद बढ़ जाएगा, लेकिन ये उतना भी आसान नहीं दिख रहा है।
क्या है वोटों का समीकरण?
चाचौड़ा सीट पर मीणा समाज का वोट निर्णायक है। मीणा समाज के करीब 60,000 वोट इस इलाके में हैं। इसके अलावा SC/ST के लगभग 50,000, लोधा समाज के 20,000, गुर्जर समाज के 15,000, माली समाज के 10,000, बाकी समाज के 50,000 से ज्यादा वोट हैं।
2018 विधानसभा चुनाव के समय चाचौड़ा में कुल 2,03,378 मतदाता थे, जिसमें 1,08,333 पुरुष और 95,042 महिला मतदाता थे। इस चुनाव में कुल 1,64,544 लोगों ने मतदान किया था। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह 81,908 वोटों से जीते थे, जबकि बीजेपी प्रत्याशी ममता मीणा को 72,111 वोटों के साथ हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में हार जीत का अंतर 9797 था।