SREEDEV KRISHNAKUMAR
SREEDEV KRISHNAKUMAR
MP Election 2023: जनसंख्या के हिसाब से भारत का पांचवां सबसे बड़े राज्य मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 17 नवंबर को मतदान होना है। BJP के शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार बढ़ते राजकोषीय घाटे, आसमान छूती महंगाई और लगातार गरीबी में इजाफे के बीच पार्टी गुटबाजी और सत्ता विरोधी लहर से जूझ रही है। राज्य निवेश हासिल करने में भी पिछड़ गया है। आइए विधानसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर एक नजर डालते हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि (GDP Growth) धीमी रही। हालांकि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था महामारी के बाद अनुकूल आधार प्रभाव के कारण FY22 में दोहरे अंकों में बढ़ी, लेकिन ये वित्त वर्ष 2023 में उस गति को बनाए रखने में विफल रही।

मध्य प्रदेश काफी हद तक अपने राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखने में कामयाब रहा है। हालांकि, ये अंतर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2023 में ये GSDP के 3.6 प्रतिशत पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 3.3 प्रतिशत था। बजट में वित्त वर्ष 2024 में राज्य का राजकोषीय घाटा GSDP का 4 प्रतिशत अनुमानित है, जो राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम में तय 3.5 प्रतिशत की सीमा से ज्यादा है।

एक सकारात्मक बात ये है कि पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बेरोजगारी दर कम है। वित्त वर्ष 2023 में बेरोजगारी दर 1.6 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय आंकड़े 3.2 प्रतिशत से कम है।

हालांकि, मध्य प्रदेश में 20.6 प्रतिशत आबादी बहुआयामी गरीबी के तहत रहती थी। ये एक ऐसा उपाय जो गरीब लोगों को पैसे के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में होने वाली कमी को दर्शाता है। गरीबी में रहने वाली आबादी की हिस्सेदारी के हिसाब से राज्य भारत में चौथे नंबर पर है।
हालांकि, मध्य प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है, लेकिन ये राष्ट्रीय औसत से कम है। FY22 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 63,345 रुपए होने का अनुमान लगाया गया था, जो राष्ट्रीय औसत 91,481 रुपए से कम थी।

राज्य उच्च महंगाई दर से भी जूझ रहा है, जो वित्त वर्ष 2019 से लगातार राष्ट्रीय औसत से ऊपर बनी हुई है। वित्त वर्ष 2022 में राज्य में उपभोक्ता कीमतें 6.2 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.5 प्रतिशत था।

भले ही मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य के रूप में जाना जाता हो, लेकिन वित्त वर्ष 2022 में मध्य प्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ। इसके बाद कृषि और सर्विस सेक्टर रहा है।
ये तब हुआ जब वित्त वर्ष 2021 में महामारी के दौरान सर्विस में 4.8 प्रतिशत और मैन्युफैक्चरिंग में 4.5 प्रतिशत की कमी आई, जबकि कृषि में 5.2 प्रतिशत का विस्तार हुआ।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अनुसार, 2022 में राज्य में 2,515 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे, जो देश में 12वें सबसे ज्यादा थे। इन स्टार्टअप्स ने 26,260 लोगों को रोजगार दिया। सबसे ज्यादा 15,571 स्टार्टअप के साथ महाराष्ट्र इस लिस्ट में टॉप पर है, जिसने 163,451 लोगों को रोजगार दिया गया।

मध्य प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने के लिए संघर्ष किया है। वित्त वर्ष 2020 में राज्य में सकल औद्योगिक पूंजी निर्माण 17,376.7 करोड़ रुपए का था, जो इसे भारत के 10 सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्यों में आठवें जगहों पर रखता है।

मध्य प्रदेश में डिजिटल डिवाइड बढ़ा है। राज्य के लगभग आधे हिस्से में इंटरनेट की पहुंच नहीं है। राज्य में टेलीडेंसिटी 51.41 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत से कम है।

केंद्र सरकार की योजनाओं के संदर्भ में, मध्य प्रदेश ने प्रधान मंत्री जन धन योजना के जरिए चार करोड़ 25 लाख 50,000 बैंक खाते खोले। ये देश का चौथा सबसे बड़ा आंकड़ा है। केवल उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में ज्यादा जन धन खाते खोले गए हैं, और ये तीनों राज्य मध्य प्रदेश से ज्यादा आबादी वाले हैं।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से राज्य में 83 लाख 30,000 लोगों ने रसोई गैस कनेक्शन का लाभ उठाया। 2011 की जनगणना के अनुसार, यह जनसंख्या का 11.3 प्रतिशत है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 2019-21 (NFHS-5) के अनुसार, राज्य में 60 प्रतिशत घर खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

लाडली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख योजना है, जिसके तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता के रूप में प्रति माह 1,000 रुपए मिलते हैं। इस योजना में 23-60 साल की उम्र की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्त महिलाओं को शामिल किया गया है। लाभार्थियों को करदाता नहीं होना चाहिए या उनके पास स्थायी रोजगार नहीं होना चाहिए, और उनकी पारिवारिक आय प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना राज्य में किसानों को कमाई का एक जरिया देती है। राज्य सरकार लगभग 71 लाख किसानों को 6,000 रुपए प्रति वर्ष देती है। यह मानते हुए कि उन्हें केंद्रीय प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रति वर्ष 6,000 रुपए भी मिलते हैं। मध्य प्रदेश में किसानों को वित्तीय सहायता के रूप में सालाना कुल 12,000 रुपए मिलते हैं।
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