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MP Election 2023 : गुना-ग्वालियर इलाके के वोटर्स पर क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया का चलेगा जादू?

मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनावों में भी मुख्य मुकाबला BJP-Congress के बीच था। तब कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा सीटे मिली थीं, जिससे कमलनाथ की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी थी। लेकिन, यह सरकार ज्यादा दिन चल नहीं पाई। कांग्रेस के कुछ विधायकों के पाला बदलने से कांग्रेस की सरकार 2020 में गिर गई थी

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Oct 30, 2023 पर 4:37 PM
MP Election 2023 : गुना-ग्वालियर इलाके के वोटर्स पर क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया का चलेगा जादू?
ज्योतिरादित्य सिंधिया इकांग्रेसी विधायकों के साथ 2020 में भाजपा में शामिल हो गए थे। इससे कमलनाथ की सरकार बनने के सिर्फ 15 महीने बाद गिर गई थी। इस बार इस इलाके की सीटों पर भाजपा को जीताने की बड़ी जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर है।

मध्य प्रदेश में इस बार Congress और BJP के बीच कांटे की लड़ाई है। राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 17 नवबंर को वोटिंग होगी। दोनों पार्टियां इन चुनावों को बहुत गंभीरता से ले रही हैं। 2018 के विधानसभा चुनावों में भी मुख्य मुकाबला इन्हीं दो दलों बीच हुआ था। तब कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा सीटे मिली थीं, जिससे कमलनाथ (Kamal Nath) की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी थी। लेकिन, यह सरकार ज्यादा दिन चल नहीं पाई। कांग्रेस के कुछ विधायकों के पाला बदलने से कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। फिर, शिवराज सिंह की अगुवाई में भाजपा ने सरकार बनाई थी। इस बार जिन इलाकों पर राजनीति पंडितों की नजरें हैं, उनमें मालवा-निमार बेल्ट शामिल हैं। अक्सर कहा जाता है कि जिस पार्टी ने इस इलाके को जीत लिया, उसका सरकार बनाना पक्का है। इस इलाके में सबसे ज्यादा चर्चा इंदौर 1 सीट की है। इस सीट से कैलाश विजयवर्गीय चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें भाजपा का बड़ा नेता माना जाता है। उधर, कांग्रेस ने इंदौर की राऊ सीट से जीतू पटवारी को टिकट दिया है।

भाजपा ने हाई प्रोफाइल नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा

भाजपा ने इंदौर से कैलाश विजयवर्गीय को चुनावी मैदान में उतारकार चौंकाया है। यहां तक कि खुद विजयवर्गीय को उम्मीद नहीं थी कि पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में उतारेगी। वह लंबे समय से इंदौर से जुड़े रहे हैं। लेकिन, वह जिस इंदौर 1 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, उसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। यहां से कांग्रेस के संजय शुक्ला चुनाव जीतते आ रहे हैं। उनके विजयवर्गीय से अच्छे रिश्ते रहे हैं। दरअसल, भाजपा मध्य प्रदेश के चुनावों को बहुत गंभीरता से ले रही है। यही वजह है कि उसने कई सासंदों को भी इस बार विधानसभा चुनावों में उतारा है। BJP का मानना है कि सासंदों के विधानसभा चुनाव लड़ने से मामला हाई-प्रोफाइल हो जाता है। इससे न सिर्फ वह सीट खास हो जाती है बल्कि इसका उसर आसपास की सीटों पर भी पड़ता है।

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