MP Elections 2023: मध्य प्रदेश में कांग्रेस-बीजेपी के बीच होगा कांटे का मुकाबला, लेकिन इन सीटों पर कमजोर है विपक्ष
MP Elections 2023: कांग्रेस की "मजबूत" सीटों की संख्या करीब 10 है, जहां से माना जाता है पार्टी का कोई उम्मीदवार जीत सकता है। लेकिन "कमजोर" सीटों की संख्या बहुत अधिक (74) है। वहीं, बीजेपी के पास तुलनात्मक रूप से मजबूत सीटों की संख्या ज्यादा (58) और कमजोर सीटों की संख्या कम (11) है। यही कारण है कि 2018 में अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकी
MP Elections 2023: कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन के बाद 4 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार बदल दिए हैं
Madhya Pradesh Elections 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (Congress) और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कड़ी लड़ाई चल रही है। अधिकांश सर्वेक्षणों में 2018 की तरह ही रिजल्ट की भविष्यवाणी क गई है, जब 230 विधानसभा सीटों में से BJP ने 109 सीटें और कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थीं। दिसंबर 2018 से मार्च 2020 के बीच 15 महीने की छोटी अवधि को छोड़कर भगवा पार्टी 2003 से लगभग 20 वर्षों तक सत्ता में रही है। विश्लेषकों के अनुसार, इस अवधि में अधिकांश समय तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान कमजोर नजर आ रहे हैं। इस बात को पार्टी ने भी स्वीकार कर लिया है, जो उन्हें अपना सीएम चेहरा घोषित करने से कतरा रही है। इस सब के बावजूद, सर्वेक्षणों से पता चलता है कि कांग्रेस फिलहाल मुकाबले में आगे चल रही है।
कांग्रेस को करना पड़ रहा विरोध का सामना
पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल कांग्रेस से टिकट पाने में नाकाम रहे आकांक्षी प्रत्याशियों के समर्थकों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया। बड़नगर से मौजूदा कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के समर्थकों ने मोरवाल को टिकट नहीं मिलने के बाद, कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कमलनाथ के भोपाल स्थित आवास के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बड़नगर से कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र सिंह सोलंकी को बदलने की मांग की और टायरों में आग लगा दी।
भोपाल के गोविंदपुरा और विदिशा के कुरवाई के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के.के. मिश्रा ने कहा कि टिकटों का वितरण बहुत सफल रहा है और पूरे राज्य से सकारात्मक संकेत आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये विरोध बहुत मामूली हैं। यह पारिवार के भीतर का मामला है जिसे सुलझा लिया जाएगा। हालांकि, बीजेपी को भी कुछ सीटों पर विरोध का सामना करना पड़ा रहा है।
विरोध के बाद बदलने पड़े उम्मीदवार
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए चार निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार बदल दिए हैं। हाल ही में कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा के कुछ दिनों बाद राज्य में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। कांग्रेस ने बुधवार सुबह सुमावली, पिपरिया, बड़नगर और जावरा विधानसभा सीटों से अपने पूर्व घोषित उम्मीदवारों को बदल दिया। बड़नगर से कांग्रेस ने अब मुरली मोरवाल को मैदान में उतारा है जिनके समर्थकों ने भोपाल में पार्टी के प्रदेश प्रमुख कमलनाथ के बंगले के सामने आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया था और टायर जलाए थे। इससे पहले कांग्रेस ने इस सीट से राजेंद्र सिंह सोलंकी को टिकट दिया था।
नर्मदापुरम जिले के पिपरिया (SC) में कांग्रेस ने गुरु चरण खरे की जगह वीरेंद्र बेलवंशी को टिकट दिया है। मुरैना जिले की सुमावली सीट से पार्टी ने पहले से घोषित कुलदीप सिकरवार की जगह अब अपने मौजूदा विधायक अजब सिंह कुशवाह को मैदान में उतारा है। 2020 में कमलनाथ सरकार के पतन के बाद उपचुनाव के दौरान कुशवाह कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए थे। इस बार कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद, कुशवाह ने अपने समर्थकों के साथ एक विरोध रैली निकाली थी।
कांग्रेस ने रतलाम जिले की जावरा सीट से भी अपना उम्मीदवार बदल दिया है, जहां पहले हिम्मत श्रीमाल को उम्मीदवार बनाया गया था। अब उसने इस सीट से वीरेंद्र सिंह सोलंकी को उम्मीदवार बनाया है। सोलंकी समर्थकों ने श्रीमाल की उम्मीदवारी का विरोध किया था।
BJP-कांग्रेस में कौन कमजोर?
कांग्रेस की "मजबूत" सीटों की संख्या करीब 10 है, जहां से माना जाता है पार्टी का कोई उम्मीदवार जीत सकता है। लेकिन "कमजोर" सीटों की संख्या बहुत अधिक (74) है। वहीं, बीजेपी के पास तुलनात्मक रूप से मजबूत सीटों की संख्या ज्यादा (58) और कमजोर सीटों की संख्या कम (11) है। यही कारण है कि 2018 में अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकी। जबकि 2008 और 2013 दोनों चुनाव में वह बड़े अंतर से हार गई। यही कारण है कि बीजेपी लगातार बड़ी जीत हासिल कर रही है।
बीजेपी ने लगभग 60 मजबूत सीटों के साथ बढ़त बना ली है। इतिहास खुद को दोहराता नहीं बल्कि तुकबंदी के लिए कहा जाता है। क्षेत्रीय समीकरण पर एक नजर डालने से पता चलता है कि कांग्रेस की तीन-चौथाई कमजोर सीटें तीन क्षेत्रों बाघेलखंड, भोपाल और मालवा से आती हैं। इन क्षेत्रों में कुल मिलाकर 126 सीटें हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो विधानसभा की 55 फीसदी ताकत बीजेपी के गढ़ वाले इलाके हैं।
कांग्रेस 2018 में भी इन तीन क्षेत्रों में सेंध नहीं लगा सकी। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जिस पर कांग्रेस अपना गढ़ होने का दावा कर सके, क्योंकि BJP को केवल 11 सीटों पर "कमजोर" कहा जा सकता है। यदि वह 2023 में चंबल (सिंधिया क्षेत्र), महाकौशल (कमलनाथ क्षेत्र) और निमाड़ (एसटी बेल्ट) में अपनी 2018 की बढ़त बरकरार रखने में सक्षम है, तो ये क्षेत्र कांग्रेस के मजबूत क्षेत्र के रूप में उभर सकते हैं।
64 सीटें तय करेंगे चुनाव का फैसला
मध्य प्रदेश में भी 64 स्विंग सीटें हैं, जिनमें से 61 पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच पेंडुलम की तरह घूमती रही हैं। 2018 में कांग्रेस ने इनमें से 41 और बीजेपी ने 20 सीटें जीती थीं। इस बदलते रुझान को तोड़ने के लिए कांग्रेस को इन सीटों को बरकरार रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। शुद्ध आधार पर उसे 21 सीटों पर रुझान का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। कमलनाथ ने शुरू में ही कांग्रेस के सामने आने वाली चुनौतियों को पहचान लिया था। उन्होंने दिग्विजय सिंह को उन 66 विधानसभा सीटों का दौरा करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जहां पार्टी कई कार्यकाल से नहीं जीत पाई थी।
2018 में राज्य विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले दिग्विजय सिंह ने इसी तरह छह महीने लंबी कठिन नर्मदा परिक्रमा पैदल पूरी की थी, जिसे कांग्रेस संगठन के पुनर्निर्माण में मदद करने का श्रेय दिया गया था। अपने हालिया दौरे के दौरान उन्होंने 100 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया। कथित तौर पर दिग्विजय ने 2023 में आगामी चुनावों में इन सीटों पर कांग्रेस की जीत के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। दूसरी ओर बीजेपी ने 2018 में कांग्रेस के हाथों हारी सीटों पर अपनी संभावनाएं बढ़ाने के लिए 7 सांसदों को मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियां एक दूसरे के पिछवाड़े में सेंध लगाने की कोशिश कर रही हैं।