ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक के करीबी वीके पांडियन ने घोषणा की है कि वह सक्रिय राजनीति छोड़ रहे हैं। ओडिशा के विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल (BJD) की करारी हार के बाद वीके पांडियन ने रविवार (9 जून) को सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। BJD कार्यकर्ताओं ने चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए तमिलनाडु के नौकरशाह से राजनीतिक नेता बने पांडियन को जिम्मेदार ठहराया है। इससे पहले पांडियन पर अपनी पहली टिप्पणी में BJD सुप्रीमो और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पार्टी की हार के लिए उनकी आलोचना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पांडियन ने शानदार काम किया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा चुनावों के साथ ओडिशा की 147-सदस्यीय विधानसभा में भी 78 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है। बीजेपी ने 5 बार के मुख्यमंत्री रहे BJD प्रमुख नवीन पटनायक की सत्ता पलट दी है। साल 2000 से ओडिशा में सत्ता में रही BJD इस बार महज 51 सीटों पर सिमट कर रह गई है। जबकि कांग्रेस ने 14 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर तीसरे नंबर पर है।
ओडिशा में सत्ता में आने से बीजेपी को लगभग उतना ही आश्चर्य हुआ है, जितना कि राज्य के मीडिया को। अब राजनीतिक गलियारों में दांव इस बात पर लग रहा है कि बीजेपी राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में किसे नियुक्त करेगी।
नवीन पटनायक ने पांडियन का किया समर्थन
चुनावों में करारी हार के बाद अपने सहयोगी पांडियन पर अपनी पहली टिप्पणी में बीजद सुप्रीमो और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पार्टी की हार के लिए उनकी आलोचना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शनिवार को कहा कि उन्होंने शानदार काम किया है। बीजू जनता दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं में व्यापक नाराजगी के बीच पटनायक ने कहा, "वह (पांडियन) एक निष्ठावान और ईमानदार व्यक्ति हैं तथा उन्हें इसके लिए याद किया जाना चाहिए।"
पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके पटनायक ने दोहराया कि पांडियन उनके उत्तराधिकारी नहीं हैं और ओडिशा के लोग तय करेंगे कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। पटनायक ने कहा कि उन्होंने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में हार को विनम्रतापूर्वक स्वीकार किया है और वे राज्य के लोगों की हर संभव तरीके से सेवा करते रहेंगे।
उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा, "पांडियन की आलोचना करना दुर्भाग्यपूर्ण है। वह पार्टी में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने कोई पद नहीं संभाला। उन्होंने किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ा। जब भी मुझसे मेरे उत्तराधिकारी के बारे में पूछा गया मैंने हमेशा स्पष्ट रूप से कहा है कि वह पांडियन नहीं हैं। मैं फिर से दोहराता हूं कि ओडिशा की जनता ही मेरे उत्तराधिकारी का फैसला करेगी।"
पटनायक ने कहा, "एक अधिकारी के तौर पर उन्होंने (पांडियन) पिछले 10 वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में शानदार काम किया है चाहे वह दो चक्रवातों के दौरान हो या कोविड-19 महामारी के दौरान। इस अच्छे काम के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर बीजद में शामिल हो गए और बेहतरीन काम कर उन्होंने पार्टी में अपना योगदान दिया। वे एक निष्ठावान और ईमानदार व्यक्ति हैं तथा उन्हें इसी बात के लिए याद किया जाना चाहिए।"