Rajasthan Election 2023: राजस्थान चुनाव में 'राज्यपाल' और 'राष्ट्रपति' भी डालेंगे वोट, 'कलेक्‍टर' को भी मिलेगा मतदान का मौका

Rajasthan Election 2023: मतदाता सूची में पहले एक IG, SP और एक तहसीलदार हुआ करते थे। हालांकि, अब सभी दिवंगत हो गए हैं। 'राजीव गांधी' नाम के एक मतदाता सरकारी जॉब कार्ड के साथ गांव में मनरेगा कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं। कलेक्टर एक 57 वर्षीय मतदाता है, जिसका नाम उसकी मां ने रखा है। वह एक कलेक्टर से बहुत प्रभावित थी, जिसने गांव का दौरा किया था। मां अधिकारी से इतना ज्यादा प्रभावित हुई कि अपने बेटे का नाम कलेक्टर रख दिया

अपडेटेड Oct 31, 2023 पर 7:24 PM
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Rajasthan Election 2023: खबर है कि राजस्थान चुनाव में राष्ट्रपति, राज्यपाल से लेकर कलेक्‍टर तक वोट डालेंगे

Rajasthan Election 2023: राजस्थान में 25 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 नवंबर है। रविवार 5 नवंबर को नामांकन पत्र दाखिल नहीं किए जा सकेंगे। राज्य में विधानसभा की 200 सीटों के लिए एक साथ 25 नवंबर को मतदान होना है। जबकि वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी। इस बीच, राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित रामनगर गांव चर्चा में है, जहां कलेक्टर से लेकर राष्ट्रपति और राज्यपाल भी मतदान करेंगे। अब आप सोच रहे होंगे कि राष्ट्रपति और राज्यपाल कैसे किसी राज्य में मतदान कर सकते हैं? चलिए हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे आखिर क्या वजह है।

क्या है गांव का इतिहास?

दरअसल, टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, रामनगर गांव बूंदी जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर स्थित है। रिपोर्ट के मुताबिक रामनगर गांव की कुल आबादी करीब 5,000 है। गांव में लगभग 2,000 मतदाता कंजर आदिवासी समुदाय से आते हैं। इसी समुदाय में किसी का नाम 'राज्यपाल' है तो किसी का 'राष्ट्रपति'...गांव में कुछ लोगों का नाम 'कलेक्टर' भी है।


TOI के मुताबिक, इन नामों की उत्पत्ति के पीछे जटिल सामाजिक इतिहास है। ब्रिटिश शासन के दौरान कंजरों को आपराधिक जनजाति के रूप में देखा जाता था, क्योंकि समुदाय के कुछ लोग अपराध और अवैध गतिविधियों में शामिल रहते थे।

आजादी के बाद भारत सरकार ने ब्रिटिश काल के कानून को वापस ले लिया था, जिसमें कंजर, भाट, मोंगिया, सांसी जैसे समुदायों को आपराधिक जनजातियों के रूप में नामित किया गया था। हालांकि, आजादी के बाद भी यहां के हालत में कोई खास बदलाव नहीं आया।

नाम के पीछे का अनोखा राज

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी समुदाय के कुछ सदस्य अगर कानून तोड़ते हैं तो पूरे समुदाय को अपराधी की दृष्टि से देखा जाता है। इसी निंदा से बचने के लिए इस समुदाय के कई लोगों ने ऐसे नाम रख लिए, जिन्हें लोग सम्मान से देखते थे। सामाजिक निंदा से बचने के लिए कई कंजरों ने ऐसे नाम रख लिए जिनसे उनके सामुदायिक संबंध छुपे हुए थे।

'राजीव गांधी' भी करेंगे मतदान

मतदाता सूची में पहले एक IG, SP और एक तहसीलदार हुआ करते थे। हालांकि, अब सभी दिवंगत हो गए हैं। 'राजीव गांधी' नाम के एक मतदाता सरकारी जॉब कार्ड के साथ गांव में मनरेगा कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं।

कलेक्टर एक 57 वर्षीय मतदाता है, जिसका नाम उसकी मां ने रखा है। वह एक कलेक्टर से बहुत प्रभावित थी, जिसने गांव का दौरा किया था। मां अधिकारी से इतना ज्यादा प्रभावित हुई कि अपने बेटे का नाम कलेक्टर रख दिया।

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अब हो रहा बदलाव

अब इंटरनेट और न्यूज चैनल गांव तक पहुंच गया हैं। इस वजह से गांव के हालत पहले से काफी बेहतर हो गए हैं। गांव के सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 650 छात्र पढ़ते हैं। दो स्थानीय लोगों को हाल ही में टीचर के रूप में भर्ती किया गया है। वे गांव के 7 सरकारी कर्मचारियों में से हैं।

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