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Telangana Election 2023: जेल में बंद चंद्रबाबू नायडू KCR को पहुंचा सकते हैं भारी नुकसान, जानें कैसे

Telangana Election 2023: KCR और नायडू के बीच लड़ाई का एक लंबा इतिहास रहा है। यह जंग नायडू द्वारा अपनी सरकार में KCR को कैबिनेट में जगह देने से इनकार करने के बाद शुरू हुई, जिसके कारण उन्हें TDP से बाहर होना पड़ा और राज्य आंदोलन में शामिल होना पड़ा। आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद TDP तेलंगाना में अप्रासंगिक हो गई। KCR द्वारा उनके खिलाफ चलाए गए वोट के बदले नोट मामले से आहत होकर नायडू ने आंध्र प्रदेश विभाजन अधिनियम के तहत 10 साल के लिए साझा राजधानी के रूप में हैदराबाद को छोड़ दिया

Akhileshअपडेटेड Oct 12, 2023 पर 12:47 PM
Telangana Election 2023: जेल में बंद चंद्रबाबू नायडू KCR को पहुंचा सकते हैं भारी नुकसान, जानें कैसे
Chandrababu Naidu Arrest: चंद्रबाबू नायडू फिलहाल पूर्वी गोदावरी जिले के राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में बंद हैं

Telangana Election 2023: साल 2014 तक तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने और अपने उद्देश्य के लिए सामाजिक लामबंदी सुनिश्चित करने के लिए आंध्र लॉबी को निशाना बनाकर लंबे समय तक राज्य आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। लेकिन आंध्र के राजनेताओं और लॉबियों को नीचा दिखाने की उनकी आदत अब लगभग एक दशक बाद उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं। आंध्र प्रदेश से संबंध रखने वाले समृद्ध और प्रभावशाली समुदाय BRS से नाराज दिखाई दे रहा है, जिसका नुकसान KCR को अगले महीने वाले तेलंगाना विधानसभा चुनाव हो सकता है।

आंध्र प्रदेश कौशल विकास परियोजना में कथित घोटाले में आंध्र सरकार द्वारा पूर्व सीएम एन चंद्रबाबू  नायडू (K Chandrashekar Rao) की गिरफ्तारी को लेकर हैदराबाद में आईटी पेशेवरों के विरोध प्रदर्शन का मजाक उड़ाना KCR के बेटे और आईटी मंत्री केटी रामा राव (KCR) लोगों के निशाने पर आ गए। दरअसल, KTR ने हैदराबाद में विरोध प्रदर्शन को मजाकिया लहले में "बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना" करार दिया था। हालांकि, KTR यह भूल गए कि यह नायडू ही थे जो हैदराबाद की साइबर सिटी के मूल हार्डसेलर थे। अभी भी उन्हें इस काम के लिए तारीख की जाती है।

KCR और नायडू के बीच लड़ाई का लंबा इतिहास

KCR और नायडू के बीच लड़ाई का एक लंबा इतिहास रहा है। यह जंग नायडू द्वारा अपनी सरकार में KCR को कैबिनेट में जगह देने से इनकार करने के बाद शुरू हुई, जिसके कारण उन्हें TDP से बाहर होना पड़ा और राज्य आंदोलन में शामिल होना पड़ा। आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद TDP तेलंगाना में अप्रासंगिक हो गई। KCR द्वारा उनके खिलाफ चलाए गए वोट के बदले नोट मामले से आहत होकर नायडू ने आंध्र प्रदेश विभाजन अधिनियम के तहत 10 साल के लिए साझा राजधानी के रूप में हैदराबाद को छोड़ दिया और जल्दी ही अपने नए गृह राज्य में चले गए। तेलंगाना में कम्मा समुदाय ने इसे KCR द्वारा नायडू का जादू-टोना करने के रूप में देखा।

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