हर साल होलिका दहन का पर्व उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होता है, लेकिन इस बार तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसका कारण है भद्राकाल, जो 13 और 14 मार्च को पड़ रहा है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा के प्रभाव में किया गया होलिका दहन अशुभ फल देता है, इसलिए इसे तभी करना चाहिए जब ये दोष समाप्त हो जाए। भद्राकाल को अशुभ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान किए गए कार्यों का प्रतिकूल प्रभाव जीवन पर पड़ सकता है। इस काल में गृह निर्माण, विवाह, यात्रा, आर्थिक लेन-देन और नई खरीदारी वर्जित होती है।
