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MahaKumbh 2025: महाकुंभ मेले में करें कल्पवास व्रत, मिलेगा पुण्य, धुल जाएंगे पाप, जानिए नियम

Prayagraj Mahakumbh 2025: महाकुंभ मेला हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन पर्व है। यह पूरी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है। जिसमें करोड़ों श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं। यह हर 12 साल में आयोजित किया जाता है। महाकुंभ मेले के दौरान कल्पवास व्रत भी किया जाता है। जानिए क्या हैं इसके नियम

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 09, 2024 पर 3:14 PM
MahaKumbh 2025: महाकुंभ मेले में करें कल्पवास व्रत, मिलेगा पुण्य, धुल जाएंगे पाप, जानिए नियम
Prayagraj Mahakumbh 2025: कल्पवास व्रत के दौरान रोजाना गंगा नदी में तीन बार स्नान करना होता है।

प्रयागराज में महाकुंभ मेले की तैयारियां लगभग अंतिम चरण में चल रही हैं। 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ इस महाकुंभ मेले की शुरुआत हो जाएगी। संगम की रेती पर हर साल की तरह लाखों भक्त कल्पवास का संकल्प लेकर एक महीने तक यहां रहेंगे, जो एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव होता है। महाकुंभ मेले के दौरान बहुत से लोग कल्पवास व्रत करते हैं। कलपवास करने की यह परंपरा कुछ परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही है। महाकुंभ मेला प्रयागराज में 45 दिनों तक चलेगा। महाकुंभ मेला धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पवित्र माना जाता है।

कल्पवास एक तरह का व्रत है। जिसमें व्यक्ति एक निश्चित अवधि के लिए विशेष नियमों का पालन करते हुए साधना करता है। कुंभ मेले में कल्पवास का अर्थ है कि श्रद्धालु संगम के तट पर निवास करते हुए वेदों का अध्ययन और ध्यान करते हैं। माना जाता है कि कल्पवास करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कुंभ मेला में क्यों होता है कल्पवास?

ऐसी मान्यता है कि महाकुंभ मेले के दौरान रोजाना तीन बार गंगा स्नान करने से 10,000 अश्वमेघ यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। साथ ही इससे सभी पाप धुल जाते हैं और भगवान का पूर्ण आशीर्वाद मिलता है। कुछ भक्तों के परिवारों में कल्पवास की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी से चलती चली आ रही है। जिसका पालन वह आज भी करते हैं। यह बहुत बहुत कठोर व्रत है। इसका पालन करने से सभी मनाकामनोओं की पूर्ति होती है।

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