लिस्टेड कंपनियों में लगभग 130 महिलाएं MD या CEO के पद पर, लेकिन ज्यादातर प्रमोटर फैमिलीज से

टॉप पोजिशंस पर प्रमोटर परिवारों से बाहर प्रोफेशनली हायर की गई महिला लीडर्स की संख्या सीमित है। वैसे तो वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 23% है, जो पिछले साल से अलग है। लेकिन सीनियर लेवल पर उनकी हिस्सेदारी तेजी से कम हुई है। सीनियर लेवल पर सैलरी में भी जेंडर गैप दिखता है

अपडेटेड Mar 08, 2026 पर 10:57 AM
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NSE में लिस्टेड 2,285 कंपनियों में से सिर्फ 5% में ही कोई महिला MD या CEO के तौर पर काम कर रही है।

भारत में लिस्टेड कंपनियों में लगभग 130 महिलाएं मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के पद पर हैं। लेकिन, उनमें से ज्यादातर प्रमोटर या फाउंडर फैमिलीज से हैं। फिर चाहे वह हिंदुस्तान यूनिलीवर की प्रिया नायर हों, अपोलो हॉस्पिटल्स की सुनीता रेड्डी हों, नाइका की फाल्गुनी नायर हों, या वेलस्पन लिविंग की दीपाली गोयनका। देश में कुल मिलाकर 119 कंपनियों में 130 महिलाएं MD/CEO पदों पर हैं।

इनमें से 82 या लगभग 63% प्रमोटर ग्रुप से हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि टॉप पोजिशंस पर प्रमोटर परिवारों से बाहर प्रोफेशनली हायर की गई महिला लीडर्स की संख्या सीमित है। Primeinfobase.com के डेटा के मुताबिक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) में लिस्टेड 2,285 कंपनियों में से सिर्फ 5% में ही कोई महिला MD या CEO के तौर पर काम कर रही है। पिछले 5 सालों में इस आंकड़े में बहुत कम सुधार देखा गया है।

वैसे तो वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 23% है, जो पिछले साल से अलग है। लेकिन सीनियर लेवल पर उनकी हिस्सेदारी तेजी से कम हुई है। कंपनियों के मैनेजमेंट के प्रमुख अधिकारियों (Key Mangement Personnel) में महिलाओं की हिस्सेदारी 14% है। एक साल पहले यह 13% थी। वहीं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स (EDs) में महिलाओं की हिस्सेदारी 10% और MDs व CEOs में सिर्फ 5% है।


NSE पर मेनबोर्ड कंपनियों में से लगभग 98% में कम से कम एक महिला डायरेक्टर

डेटा से यह भी पता चला है कि NSE पर मेनबोर्ड सेगमेंट में लिस्टेड 2,285 कंपनियों में से लगभग 98% में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है। एक साल पहले यह प्रतिशत 97% था। 48 कंपनियों के बोर्ड में अभी भी कोई महिला डायरेक्टर नहीं है। इनमें से 20 पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) हैं।

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सैलरी में भी अंतर

सीनियर लेवल पर सैलरी में भी जेंडर गैप दिखता है। पुरुष एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की मीडियन सैलरी ₹120 लाख थी, जो महिला एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की मीडियन सैलरी के ₹69 लाख से लगभग 74% ज्यादा है। हालांकि, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के मामले में ट्रेंड अलग है। महिला इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को उनके पुरुष साथियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा सैलरी मिलती है। उनकी मीडियन सैलरी ₹4.90 लाख है, जबकि पुरुषों के लिए यह ₹4.80 लाख है।

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