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US में टैरिफ पर नए डेवलपमेंट के बाद वेट एंड वॉच मोड में एक्सपोर्टर, क्लैरिटी का इंतजार: Tata Steel MD

अभी के लिए अनिश्चितता ही मुख्य बात है। कंपनियां बिजनेस से जुड़े फैसले लेने से पहले फॉलो-अप अनाउंसमेंट्स का इंतजार कर रही हैं। कंपनियां यह भी ट्रैक कर रही हैं कि यूरोप में टैरिफ कैसे लागू होंगे। अमेरिका में बदलते पॉलिसी रुख से क्लैरिटी की कमी और बढ़ गई है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Feb 21, 2026 पर 6:41 PM
US में टैरिफ पर नए डेवलपमेंट के बाद वेट एंड वॉच मोड में एक्सपोर्टर, क्लैरिटी का इंतजार: Tata Steel MD
टीवी नरेंद्रन ने कहा कि सप्लाई चेन पर असर शायद फाइनल पॉलिसी डिटेल्स पर निर्भर करेगा।

व्हाइट हाउस के नए नोटिफिकेशन के बाद अमेरिका में इंपोर्ट होने वाले भारतीय सामान पर एक्स्ट्रा टैरिफ कम होकर 10% रह जाएगा। नए फ्रेमवर्क के असर पर बात करते हुए, टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन ने कहा कि कंपनियों को लंबे समय के असर का अंदाजा लगाने से पहले अभी भी क्लैरिटी का इंतजार है। नरेंद्रन के मुताबिक, भारत की स्टील इंडस्ट्री अमेरिका में टैरिफ पर नए डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रही है। सप्लाई चेन पर असर शायद फाइनल पॉलिसी डिटेल्स पर निर्भर करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पिछले साल भारत समेत करीब 60 देशों के खिलाफ जारी किए गए टैरिफ ऑर्डर्स को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रद्द घोषित कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़े लेवी लगाकर अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ट्रंप ने अमेरिका में आने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ को मौजूदा लागू रेट के अलावा 10% बढ़ाने का फैसला किया है। ट्रंप ने शुक्रवार देर रात एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। इसके तहत मंगलवार, 24 जनवरी से 150 दिनों के लिए ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत 10% का नया टैरिफ लगाया जाएगा।

व्हाइट हाउस ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन के साथ टैरिफ डील करने वाले ट्रेडिंग पार्टनर्स को एक्स्ट्रा टैरिफ के तौर पर 10 प्रतिशत ड्यूटी का सामना करना पड़ेगा। भले ही पहले हुई डील्स के तहत ज्यादा टैरिफ रेट पर सहमति बनी हो, लेकिन अब उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

स्टील सेक्टर पर सीधे तौर पर कोई असर नहीं

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