वोडाफोन आइडिया के बाद अब भारती एयरटेल और भारती हेक्साकॉम ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया मामले में राहत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। तर्क दिया गया है कि बिना छूट के लायबिलिटी जारी रहने से न केवल उनके ऑपरेशंस पर बल्कि पूरे टेलिकॉम सेक्टर पर असर पड़ेगा। अपनी याचिका में भारती कंपनियों ने कहा, "AGR बकाया ने दोनों भारती कंपनियों की बहुत जरूरी आक्रामक नेटवर्क रोलआउट जरूरतों को पूरा करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है... छूट के अभाव में भारती कंपनियों और पूरे टेलिकॉम सेक्टर का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।"
याचिका में कहा गया है कि ब्याज और जुर्माने के कारण 9,235 करोड़ रुपये की मूल देनदारी बढ़कर 43,980 करोड़ रुपये हो गई है। दूरसंचार विभाग (DoT) के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक कंपनियों पर अभी भी 38,397 करोड़ रुपये बकाया हैं।
10 साल में भरी 75000 करोड़ की लाइसेंस फीस
ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एयरटेल ने सरकारी खजाने में अपने महत्वपूर्ण योगदान पर भी रोशनी डाली है। कंपनी ने एक दशक में लाइसेंस फीस के रूप में 75,000 करोड़ रुपये और GST के रूप में 22,000 करोड़ रुपये का पेमेंट किया है। समूह का कहना है कि सभी प्रभावित टेलिकॉम लाइसेंसहोल्डर्स को बिना किसी भेदभाव के राहत दी जानी चाहिए।
AGR बकाए में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की छूट चाहती है VIL
इससे पहले वोडाफोन आइडिया ने अपने AGR बकाया में और राहत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की थी। कंपनी ने अपनी याचिका में AGR पर पहले के फैसले का हवाला दिया है और बकाए में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक को माफ करने की मांग की है। विशेष रूप से AGR लेवी में पेनल्टी कंपोनेंट पर जुर्माना और ब्याज माफ करने की मांग की गई है। वोडाफोन आइडिया का तर्क है कि AGR फैसले द्वारा लगाई गई बाधाओं के कारण सरकार आगे राहत नहीं दे सकती है। इस याचिका पर सुनवाई 19 मई को होने वाली है।
वोडाफोन आइडिया ने यह भी कहा है कि सरकार के सपोर्ट के बिना वह वित्त वर्ष 2025-26 से आगे काम नहीं कर पाएगी। उसे दिवालियापन यानि इनसॉल्वेंसी के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।