India vs China GDP: दुनिया भर में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का माहौल बना हुआ है। लेकिन इसके बावजूद एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, भारत और चीन मजबूती से आगे बढ़ती नजर आ रही हैं। ताजा आंकड़े बताते हैं कि चीन की इकॉनमी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। लेकिन भारत की ग्रोथ रफ्तार उससे भी ज्यादा तेज बनी हुई है।
चीन की अर्थव्यवस्था ने साल 2026 की पहली तिमाही में 5% की ग्रोथ दर्ज की है, जो बाजार के अनुमानों से बेहतर है। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ऑफ चाइना के मुताबिक, इस दौरान चीन की GDP का कुल साइज 33.4 ट्रिलियन युआन (करीब 4.87 ट्रिलियन डॉलर) रहा। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा है। इस प्रदर्शन को चीन की नई 15वीं पंचवर्षीय योजना का मजबूत शुरुआत माना जा रहा है।
हालांकि चीन की अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर समस्याओं से जूझ रही है। जैसे कमजोर घरेलू मांग, घटती आबादी और रियल एस्टेट पर संकट। फिर भी ग्रोथ मजबूत बनी रही। प्रॉपर्टी सेक्टर में निवेश पहली तिमाही में 11.2% गिरा, जो पिछले साल की तुलना में और ज्यादा गिरावट दिखाता है।
भारत की ग्रोथ रफ्तार और तेज
भारत की मार्च तिमाही के आधिकारिक जीडीपी आंकड़े 29 मई 2026 को जारी किए जाएंगे। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च तिमाही में भारत की जीडीपी के 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। वहीं दूसरे अनुमानों के मुताबिक, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.6% रहने की उम्मीद है।
वहीं इससे पहले दिसंबर 2025 की तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी। साफ है कि चीन के मुकाबले भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट की रफ्तार अधिक तेज बनी हुई है।
चीन की सरकार ने घटाया GDP लक्ष्य
ग्लोबल अनिश्चितताओं को देखते हुए चीन ने 2026 के लिए अपने GDP ग्रोथ अनुमान को घटाकर 4.5% से 5% कर दिया है। इसके पीछे अमेरिका के टैरिफ, पश्चिम एशिया में युद्ध और घरेलू आर्थिक दबाव जैसे कारण हैं। वहीं इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने भी चीन की 2026 की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 4.4% कर दिया है।
दूसरी ओर RBI ने मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के 6.9% रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि वह ग्लोबल परिस्थितियों को देखते हुए 'वेट एंड वॉच' मोड में है। इसके अलावा IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। इससे पहले जनवरी में यह अनुमान 6.4% था।
युद्ध के असर से कैसे बचा चीन?
दुनिया में ऊर्जा संकट और सप्लाई की दिक्कतों के बावजूद चीन पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा। इसकी बड़ी वजह यह है कि चीन ने ऊर्जा के लिए कई अलग-अलग स्रोत अपनाए हैं। साथ ही, उसकी कुल ऊर्जा खपत में तेल की हिस्सेदारी 20% से भी कम है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें बढ़ने का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर कम पड़ा। हालांकि भारत की ग्रोथ स्टोरी अलग है। भारत की अर्थव्यवस्था ज्यादा घरेलू खर्च पर टिकी है, इसलिए यहां तेल की कीमतों और ग्लोबल हालात का असर ज्यादा देखने को मिलता है।
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