आंध्र प्रदेश सरकार ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को विशाखापट्टनम में एक डेवलपमेंट सेंटर बनाने के लिए 21.16 एकड़ जमीन केवल 99 पैसे में आवंटित करने की मंजूरी दी। यह निर्णय मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसे राज्य के IT सेक्टर में निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार TCS के लिए यह प्रस्ताव राज्य के IT मंत्री नारा लोकेश के नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया। अक्टूबर 2024 में नारा लोकेश ने मुंबई स्थित टाटा ग्रुप के हेडक्वार्टर का दौरा किया था और वहां TCS को आंध्र प्रदेश में एक बड़े पैमाने पर डेवलपमेंट सेंटर बनाने के लिए आमंत्रित किया था। इसके बाद से राज्य सरकार और TCS के बीच लगातार बातचीत होती रहीं, जिसका नतीजा आज इस जमीन आवंटन के रूप में सामने आया है।
नारा लोकेश ने इस फैसले को "आंध्र प्रदेश की निवेश मित्रता" का प्रतीक बताते हुए कहा, “हम देश और दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि आंध्र प्रदेश आईटी इंडस्ट्री के लिए अगला बड़ा केंद्र बनने को तैयार है। TCS को इस तरह की पेशकश करके हम निवेशकों को यह विश्वास दिला रहे हैं कि यहां उन्हें न केवल संसाधन, बल्कि सरकार का पूरा सहयोग भी मिलेगा।”
इस भूमि को 99 पैसे के "टोकन अमाउंट" पर देना एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है, जिससे यह साफ हो जाता है कि राज्य सरकार लंबे समय की संभावनाओं पर विश्वास कर रही है, और वह निवेश आकर्षित करने के लिए शुरुआती तौर पर रियायत देने को भी तैयार है।
यह फैसला उस ऐतिहासिक पल की याद दिलाता है, जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने टाटा मोटर्स को साणंद में जमीन केवल 99 पैसे में आवंटित करवाई थी, जिससे गुजरात देश का एक प्रमुख ऑटोमोबाइल हब बनकर उभरा। अब आंध्र प्रदेश उसी राह पर चलने की कोशिश कर रहा है — इस बार आईटी सेक्टर के जरिए।
TCS, जो हाल ही में धीमी ग्रोथ रेट के कारण सुर्खियों में है, उसके लिए यह प्रस्ताव विशाखापट्टनम को एक नए "ग्रोथ हब" के रूप में तैयार कर सकता है। समुद्री तट पर स्थित, इंफ्रास्ट्रक्चर से फुल और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण यह शहर, कंपनी के लिए दक्षिण भारत में एक नए केंद्र के रूप में उभर सकता है।