$68,000 पर आया बिटकॉइन, ईरान-अमेरिका युद्ध के लंबा चलने की आहट से सहमा क्रिप्टो बाजार; क्या फेल हो गया 'सेफ हेवन' का दावा?

Bitcoin Falling: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच फरवरी के अंत में शुरू हुए युद्ध ने बिटकॉइन की साख को कड़ी चुनौती दी है। युद्ध की शुरुआत से अब तक बिटकॉइन में करीब 20% की भारी गिरावट हो चुकी है, जिससे वह $69,000 से भी नीचे फिसल गया है

अपडेटेड Mar 23, 2026 पर 10:10 AM
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युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन अब तक अपनी वैल्यू का लगभग 20% गंवा चुका है

Crypto Markets: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध के विस्तार ने वैश्विक फाइनेंशियल बाजारों में खलबली मचा दी है। इसका बड़ा असर क्रिप्टो मार्केट पर भी देखने को मिला है। बीते दिन बिटकॉइन समेत तमाम बड़ी डिजिटल करेंसी में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए।

रविवार को दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन 3.3% गिरकर $68,150 के स्तर पर आ गई। मार्च की शुरुआत के बाद यह इसका सबसे निचला स्तर है। ईथर में करीब 5% की गिरावट आई और यह $2,050 पर पहुंच गया। इसके अलावा सोलाना, XRP और कार्डानो में भी भारी बिकवाली देखी गई। फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन अब तक अपनी वैल्यू का लगभग 20% गंवा चुका है।

क्या फेल हुआ 'सेफ हेवन' का दावा?


क्रिप्टो निवेशक अक्सर तर्क देते हैं कि संकट के समय बिटकॉइन सोने की तरह एक सुरक्षित निवेश है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने इस दावे की पोल खोल दी है। विशेषज्ञ पीटर टीचिर के अनुसार, बिटकॉइन इस समय शेयर बाजार और अन्य 'रिस्की एसेट्स' की तरह ही व्यवहार कर रहा है। जैसे ही युद्ध का खतरा बढ़ता है, निवेशक डर के मारे सबसे पहले क्रिप्टो से पैसा निकालते हैं। युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी की कीमतें बढ़ गई हैं। चूंकि बिटकॉइन की माइनिंग में भारी बिजली खर्च होती है, इसलिए बढ़ी हुई लागत भी इस इंडस्ट्री पर दबाव बना रही है। अमेरिका में क्रिप्टो से जुड़े नए नियमों की उम्मीदें भी धुंधली पड़ रही हैं क्योंकि वाशिंगटन का पूरा ध्यान फिलहाल युद्ध पर है।

ट्रंप की धमकी और ईरान का पलटवार

बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान की ताजा बयानबाजी है। दरअसल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को 48 घंटे में नहीं खोला, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को बम से उड़ा देगा। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी-इजरायली ठिकानों को निशाना बनाएगा और होर्मुज को हमेशा के लिए बंद कर देगा।

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