क्रिप्टो निवेशक अक्सर तर्क देते हैं कि संकट के समय बिटकॉइन सोने की तरह एक सुरक्षित निवेश है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने इस दावे की पोल खोल दी है। विशेषज्ञ पीटर टीचिर के अनुसार, बिटकॉइन इस समय शेयर बाजार और अन्य 'रिस्की एसेट्स' की तरह ही व्यवहार कर रहा है। जैसे ही युद्ध का खतरा बढ़ता है, निवेशक डर के मारे सबसे पहले क्रिप्टो से पैसा निकालते हैं। युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी की कीमतें बढ़ गई हैं। चूंकि बिटकॉइन की माइनिंग में भारी बिजली खर्च होती है, इसलिए बढ़ी हुई लागत भी इस इंडस्ट्री पर दबाव बना रही है। अमेरिका में क्रिप्टो से जुड़े नए नियमों की उम्मीदें भी धुंधली पड़ रही हैं क्योंकि वाशिंगटन का पूरा ध्यान फिलहाल युद्ध पर है।