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Budget 2022 : कैपिटल बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं कर सकी हैं आर्मी और इंडियन एयर फोर्स

पिछले हफ्ते डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने सीनियर डिफेंस ऑफिसर्स की मीटिंग बुलाई थी। इसमें उन्होंने अब तक हुए कुल खर्च का जायजा लिया था। उन्होंने सेना के अंगों के घरेलू उपकरणों की खरीदारी के लक्ष्य की प्रगति रिपोर्ट की भी समीक्षा की थी

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 28, 2022 पर 4:25 PM
Budget 2022 : कैपिटल बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं कर सकी हैं आर्मी और इंडियन एयर फोर्स
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। इसमें डिफेंस के लिए बजट आवंटन भी शामिल होगा।

डिफेंस सर्विसेज (Defense Services) कैपिटल बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं कर सकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में ज्यादा आवंटन की मांग की हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। बजट में आवंटित रकम खर्च करने में आर्मी (Army) सबसे पीछे रही है। न्यूज वेबसाइट न्यूज18 ने यह जानकारी दी है।

आर्मी ने अपने चालू वित्त वर्ष के दौरान अपने कैपिटल बजट का सिर्फ 40 फीसदी इस्तेमाल किया है। इंडियन एयरफोर्स (Indian Airforce) ने 70 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल किया है। करीब 90 फीसदी खर्च के साथ नेवी (Navy) इस मामले में पहले पायदान पर रही है। न्यूज18 ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पिछले वित्त वर्ष में सेना के तीनों अंगों के एक्चुअल कैपिटल एक्सपेंडिचर के बारे में अभी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जाता है कि यह चालू वित्त वर्ष के मुकाबले बहुत ज्यादा था। चालू वित्त वर्ष खत्म होने में सिर्फ दो महीने का समय बचा है।

पिछले हफ्ते डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने सीनियर डिफेंस ऑफिसर्स की मीटिंग बुलाई थी। इसमें उन्होंने अब तक हुए कुल खर्च का जायजा लिया था। उन्होंने सेना के अंगों के घरेलू उपकरणों की खरीदारी के लक्ष्य की प्रगति रिपोर्ट की भी समीक्षा की थी। एक सूत्र के मुताबिक, उन्होंने सर्विसेज को जल्द से जल्द कैपिटल बजट को खर्च करने को कहा था ताकि इस वित्त वर्ष के अंत तक अधिकतम हिस्सा खर्च कर लिया जाए।

चालू वित्त वर्ष (2021-22) के लिए कुल डिफेंस बजट 4.78 लाख करोड़ रुपये है। इसमें से कैपिटल बजट 1.45 लाख करोड़ रुपये है। इस वित्त वर्ष के दौरान आर्मी के लिए कैपिटल बजट 36,000 करोड़, नेवी के लिए 33,000 करोड़ रुपये और इंडियन एयर फोर्स के लिए 58,000 करोड़ रुपये है। कई सूत्रों के मुताबिक, कम खर्च की सबसे बड़ी वजह कोरोना की महामारी रही। इसके चलते कई कॉन्ट्रैक्ट्स अंजाम तक नहीं पहुंच सके और डिलीवरी में देर हुई।

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