Union Budget : एयरलाइंस कंपनी इंडिगो (Indigo) के सीईओ रोनोजॉय दत्ता ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) से सिविल एविएशन इंडस्ट्री पर इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax) घटाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि एयरलाइंस कंपनियों को अपने रेवेन्यू का 21 फीसदी इनडायरेक्ट टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है। इससे इस इंडस्ट्री की हालत खराब हो रही है। वित्त मंत्री 1 फरवरी को बजट (Budget 2022) पेश करेंगी।
दत्ता ने वित्त मंत्री ने फ्यूल पर सेंट्रल एक्साइज टैक्स 11 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की गुजारिश की है। उन्होंने एयरक्राफ्ट रिपेयर पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस कंपनियां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराती हैं, जो देश में रोजगार और इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए जरूरी है। इसके बावजूद एयरलाइंस इंडस्ट्री (Airlines Industry) को बहुत कम इनपुट क्रेडिट के साथ सरकार को अपने रेवेन्यू का 21 फीसदी इनडायरेक्ट टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है।
इंडिगो के सीईओ ने कहा कि यह सोचना गलत है कि एयरलाइंस इंडस्ट्री को सिर्फ सरकार को टैक्स चुकाने के लिए 21 फीसदी मार्जिन कमाना चाहिए। ज्यादा टैक्स का इस इंडस्ट्री पर खराब असर पड़ रहा है। इस इंडस्ट्री का हालत पहले से खराब है। यह कारोबार और रोजगार के मौके बढ़ाने के लिहाज से अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (crisil) ने 17 जनवरी को अपनी रिपोर्ट में कहा था कि घरेलू एयरलाइंस कंपनियों को वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसकी वजह कोरोना की तीसरी लहर और फ्यूल की उंची कीमतें हैं।
दत्ता ने वित्त मंत्री से एयरलाइंस इंडस्ट्री की लंबित समस्याओं को हल करने के लिए तुरंत कदम उठाने की गुजारिश की। उन्होंने कहा, "फ्यूल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 11 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी की जानी चाहिए। एटीएफ (ATF) को जीएसटी (GST) के तहत लाया जाना चाहिए। साथ ही रिपेयर पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म होनी चाहिए।" अगर सरकार इन मांगों को मान लेती है तो इससे एविएशन इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज होगी। इसका असर कई तरह से इकोनॉमी पर पड़ेगा।
साल 2020 में कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद सरकार ने लॉकडाउन का एलान किया था। इससे एयरलाइंस कंपनियों के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं पर रोक लग गई। इसका बहुत खराब असर इन कंपनियों की वित्तीय सेहत पर पड़ा। दूसरी लहर के बाद धीरे-धीरे एयरलाइंस कंपनियों की स्थिति सुधर रही थी। लेकिन कोरोना की तीसरी लहर ने फिर से बड़ी समस्या खड़ी कर दी।