बजट 2022 (Budget 2022) में स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZs) में स्थित इकाइयों को भी देश में अपना सामान बेचने की इजाजत मिल सकती है। इस मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स (Department of Commerce) को उम्मीद है कि सरकार बजट में SEZ में स्थित इकाइयों को बिना कोई अतिरिक्त कस्टम्स ड्यूटी (Customs Duty) चुकाए देश में अपना सामान बेचने की अनुमति दे सकती है।
सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय से सैद्धांतिक रूप से मंजूरी भी मिल गई है और इसे आगामी बजट में शामिल भी किया जा सकता है। बता दें कि डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स पिछले कुछ समय से SEZ इकाइयों के लिए बने कड़े नियमों में ढील देने पर जोर दे रहा था।
यह फैसला इस तथ्य से उपजा है कि जहां एक SEZ की संख्या देश में तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ कई का प्रदर्शन औसत से कम है और कई ने तो कामकाज भी बंद कर दिया है।
कॉमर्स मिनिस्ट्री के एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में अभी 426 SEZ हैं, जिन्हें औपचारिक रूप से SEZ एक्ट, 2005 के तहत मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 33 SEZ को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि 30 सिंतबर 2021 की तारीख तक सिर्फ 268 SEZ ही चालू हालत में थे।
डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के सीनियर अधिकारी ने बताया, "जब इस पॉलिसी को तैयार किया गया था, उस समय केंद्र सरकार ने जो उम्मीद लगाई थी, उसके मुकाबले आज अच्छे और मुनाफे के साथ विदेशों में सामान निर्यात करने वाली कंपनियों का इकाइयों की संख्या बहुत कम है।"
जो SEZ अभी चालू हालत में हैं, उनमें मोटे तौर पर अभी करीब 5,600 इकाइयां हैं, जिनमें करीब 25.6 लाख लोग काम कर रहे हैं। सरकार अब इन सभी को बिजनेस के लिए अधिक राहत उपाय देने पर सोच रही है। इससे पहले इस इंडस्ट्री के तमाम प्रतिनिधियों ने सरकार से मिलकर कोरोना महामारी के चलते ग्लोबल लेवल पर व्यापार पर लगे प्रतिबंधों और उसके चलते आई आर्थिक सुस्ती को ध्यान में रखते हुए कई राहत उपाय देने की मांग की थी।
SEZ एक्ट, 2005 की धारा 30 के तहत SEZ में बने सामानों की घरेलू बाजार यानी देश में बिक्री पर बैन है। अगर एक SEZ इकाई घरेलू बाजार में सप्लाई करती है, तो उसे इंपोर्ट के रूप में देखा जाता है और उस पर इंपोर्ट शुल्क देना होता है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि SEZ को एक विशेष रूप से टैक्स और ड्यूटी मुक्त जोन बनाया गया है। इसे व्यापार, ड्यूटी और टैरिफ के उद्देश्य से एक विदेशी क्षेत्र माना जाता है। वर्तमान में, SEZ इकाइयों को घरेलू बाजार में सामान सप्लाई करने पर इंपोर्ट ड्यूटी के अलावा, इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स (IGST) का भी भुगतान करना होता है।