BUDGET 2022: बजट में इन उपायों से आसान होगी आम आदमी की जिंदगी

पिछले दो साल से कोरोना की महामारी ने आम आदमी की जिंदगी और मुश्किल कर दी है। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) उनके दर्द पर मरहम लगाने वाले उपायों का एलान बजट (Budget 2022) में कर सकती हैं

अपडेटेड Jan 20, 2022 पर 2:27 PM
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आम लोगों को स्टैंडर्ड डिडक्शन लिमिट, टैक्स की दरों में कमी सहित बजट 2022 से कई उम्मीदें हैं।

अगले वित्त वर्ष (2022-23) का बजट (Budget 2023) पेश होने में कुछ ही दिन रह गए हैं। इस बजट से आम आदमी को बहुत उम्मीदें हैं। दरअसल, कोरोना की महामारी, बढ़ती महंगाई और ज्यादा मेडिकल खर्च ने उसकी हालत बिगाड़ दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) उसके दर्द पर मरहम लगा सकती हैं। वह 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करेंगी। यह उनका चौथा बजट होगा। आइए जानते हैं बजट में किन-किन उपायों से आम आदमी की जिंदगी आसान हो जाएगी।

इनकम टैक्स रेट्स में कमी

वित्त मंत्री से लोग इनकम टैक्स दरों (Income Tax rates) में कमी चाहते हैं। अभी देश में इनकम टैक्स की दर (उच्चतम) कॉर्पोरेट टैक्स (Corporates Tax) से भी ज्यादा है। इस असंतुलन को दूर करने की जरूरत है। इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स जो सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब में आते हैं उन्हें 30 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है। सरचार्ज (Surcharge) और एजुकेशन सेस (Education cess) को शामिल करने के बाद यह दर 42.74 फीसदी तक पहुंच जाती है। इसके मुकाबले घरेलू कंपनियों पर टैक्स की दर सिर्फ 25 फीसदी है। सरचार्ज और एजुकेशन सेस के बाद यह दर थोड़ी बढ़ जाती है। उम्मीद है कि वित्त मंत्री बजट में सालाना 10,00,000 लाख रुपये से ज्यादा इनकम वाले इंडिविजुअल टैक्सपेयर को राहत देने के लिए टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करेंगी।

डिडक्शन और एग्जेम्प्शन लिमिट में वृद्धि


बीते कुछ सालों में लोगों की कॉस्ट ऑफ लिविंग (Cost of Living) तेजी से बढ़ी है। इसकी वजह ट्यूशन फीस, मेडिकल एक्सपेंसेज, रेंटल एक्सपेंसेज सहित जरूरी खर्चों में वृद्धि है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकती हैं। इससे अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने में भी हेल्प मिलेगी। लोगों को सेविंग्स बढ़ाने का भी मौका मिलेगा।

1. इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर सालाना 2,50,000 रुपये कर दी जाए। अभी इस सेक्शन के तहत सालाना डिडक्शन लिमिट 1.5 लाख रुपये है।

2. होम लोन पर चुकाए जाने वाले इंट्रेस्ट पर डिडिक्शन की लिमिट बढ़ाकर 2,50,000 रुपये कर दी जाए। अभी खुद के रहने के लिए घर के होम लोन के इंट्रेस्ट पर सालाना 2,00,000 रुपये डिडक्शन लिमिट है।

3. वित्त मंत्री इस मुश्किल वक्त में किराया पर घर देने वाले मालिकों को राहत दे सकती हैं। उनके लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी किया जा सकता है।

4. कोरोना की महामारी ने लोगों का मेडिकल खर्च बढ़ा दिया है। इसलिए इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80डी के तहत खुद और परिवार के लिए मेडीक्लेम पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन लिमिट को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की जरूरत है। बुजुर्गों के लिए से 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार करना ठीक होगा।

5. सेविंग्स अकाउंट (Saving Account) में जमा पैसे के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट के दायरे में बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट, पोस्टऑफिस और ऐसी दूसरी स्कीमों को भी लाने की जरूरत है। अभी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80टीटीए के तहत सालाना 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की भी जरूरत है।

वर्क फ्रॉम होम वाले इंप्लॉइज के लिए डिडक्शन

कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद से बड़ी संख्या में इंप्लॉइज घर से काम कर रहे हैं। इससे इलेक्ट्रिसिटी, इंटरनेट, फर्निचर जैसी चीजों पर उनका खर्च बढ़ गया है। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को ऐसे खर्चों को देखते हुए रीइंबर्समेंट और अलाउंसेज दे रही हैं। सरकार को ऐसे कर्मचारियों के लिए सालाना 50,000 रुपये के अतिरिक्त डिडक्शन का ऐलान बजट में करना चाहिए।

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