Budget 2023: आजाद भारत देश के 75 सालों में 73 बार बजट पेश किया जा चुका है। हर बार बजट एक नई उम्मीद लेकर आता है। इसमें कई तरह सुधार, नई योजनाएं, नए नियम आते हैं। इस बार के बजट का कुछ खास होने वाला है। हर सेक्टर से जुड़े लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। जब 1997-98 में बजट पेश किया गया था तो से 'ड्रीम बजट' कहा गया। वहीं इसके पहले जब 1973 में बजट पेश किया गया तो उसे ब्लैक बजट कहा गया। ये बजट यशवंतराव बी चव्हाण (Yashwantrao B. Chavan) पेश किया था। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर ब्लैक बजट क्या है, किस स्थिति में आता है। क्यों पेश किया जाता है।
ब्लैक बजट उसे कहते हैं, जिसमें सरकार को खर्च में कटौती करनी पड़ जाए। इसे ऐसे समझिए कि अगर सरकार की आमदनी 100 रुपये हो और उसका खर्च 125 रुपये हो तो सरकार को बजट में 25 रुपये की कटौती करनी पड़ जाएगी। ऐसे में इसे ब्लैक बजट कहा जाएगा।
आखिर क्यों पेश किया गया ब्लैक बजट
बात साल 1973-74 की है। उस समय सरकार का वित्तीय घाटा 550 करोड़ रुपये हो गया था। भारत उस दौरान बड़ी आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। वो साल था जब मानसून भी अच्छा नहीं हुआ था। उस समय इंदिरा गांधी की सरकार थी। इन सभी हालात की वजह से देश की कमाई कम और खर्चा ज्यादा हो गया था। देश की अर्थव्यवस्था का काफी नुकसान हुआ था। उसी साल कोयले की खदानों का राष्ट्रीयकरण किए जाने के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इससे कोयले के क्षेत्र में बाजार प्रतिस्पर्धा की खत्म हो गई और सरकार की आय पर काफी असर पड़ा। ऐसे में उस समय के वित्त मंत्री यशवंत राव बी चव्हाण को ब्लैक बजट पेश करना पड़ गया था।
युद्ध की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर
भारत ने 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ा था। इसमें बांग्लादेश को आजाद कराया था। वैसे तो ये युद्ध बहुत लंबा नहीं चला था, फिर भी इसमें बहुत पैसा और राशन खर्च हो गया था। इसके साथ ही भारत पर सूखे की मार पड़ गई। इन दोनों कारणों से अर्थव्यवस्था बेहद खराब हो गई थी। जिससे ब्लैक बजट पेश करने की नौबत आई थी।