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बजट 2023: कंजम्प्शन, प्रति व्यक्ति आय...बढ़ाने से तेज होगी इकोनॉमिक ग्रोथ

बजट 2023 ऐसे वक्त पेश होने जा रहा है, जब भारत अमृत काल में प्रवेश कर गया है। सरकार ने 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य तय किया है। देश की आबादी में युवाओं की संख्या ज्यादा है और इनवेस्टमेंट के लिए अनुकूल माहौल है। इसका फायदा इंडिया को मिलना तय है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Dec 14, 2022 पर 5:30 PM
बजट 2023: कंजम्प्शन, प्रति व्यक्ति आय...बढ़ाने से तेज होगी इकोनॉमिक ग्रोथ
अभी PLI स्कीम के लाभ खास सेक्टर की बड़ी कंपनियों तक सीमित हैं। अगर सरकार मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहती है तो उसे PLI स्कीम के दायरे में MSME को भी लाना होगा।

साकेत डालमिया

बजट 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ऐसे वक्त नया यूनियन बजट (Union Budget) पेश करने जा रही हैं, जब जियो-पॉलिटिकल टकराव, हाई इनफ्लेशन और ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इंडिया के टॉप 10 एक्सपोर्ट डेस्टिनेशंस और टॉप 10 इंपोर्ट वाले देशों की इकोनॉमिक ग्रोथ 2023 में घटने का अनुमान है। ऐसे में ग्रोथ के घरेलू स्रोतों को बढ़ावा देने और एक्सपोर्ट के नए मौके तलाशने के लिए नापतौल कर कदम उठाने होंगे। इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ की अच्छी रफ्तार बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। पिछले तीन साल में सरकार की तरफ से उठाए गए आर्थिक सुधार के कदमों से इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले फैक्टर्स को मजबूती मिली है। फिर भी, हमें कंजम्प्शन बढ़ाने और इनवेस्टमेंट के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर फोकस करना होगा।

मेरा मानना है कि देश में कंजम्प्शन से संबंधिति गतिविधियां बढ़ने से फैक्ट्रियों की क्षमता का ज्यादा इस्तेमाल हो सकेगा। इससे क्षमता बढ़ाने के लिए उत्पादकों के बीच सेंटिमेंट मजबूत होगा। ऐसे दो बड़े फैक्टर्स हैं, जो एक विकासशील देश को विकसित देश बनाते हैं। पहला है एक्सपोर्ट और दूसरा है प्रति व्यक्ति इनकम में इजाफा। इन दोनों पर फोकस करने से कंजम्प्शन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही जीडीपी के फीसदी के रूप में एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

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