Budget 2023: मुश्किल नहीं है बजट को समझना अगर इन शब्दों का मतलब आप जान लें

Budget 2023: केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman अगले वित्त वर्ष 2023-24 का बजट एक फरवरी को पेश करेंगी। बजट पर आम से लेकर खास की निगाहें रहती हैं। अब बजट इतना अहम है तो इसे पूरा समझना भी जरूरी हो जाता है तो इसे समझने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले टर्म्स यानी शब्दों का अर्थ जानना चाहिए

अपडेटेड Jan 09, 2023 पर 5:30 PM
संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत सरकार एक वित्त वर्ष में सभी प्राप्तियों और खर्च का ब्यौरा संसद में पेश करती है।

Budget 2023: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट अगले वित्त वर्ष यानी 2023-24 का होगा। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। कई लोगों की बजट में दिलचस्पी तो होती है, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले कुछ शब्दों (Terms) की वजह से उन्हें दिक्कत होती है। हम आपको उन महत्वपूर्ण टर्म्स के बारे में बता रहे हैं, जिनका हर साल बजट डॉक्युमेंट्स में इस्तेमाल होता है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में भी ये शब्द आपको बार-बार सुनने को मिलेंगे।

Annual Financial Statement

संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत सरकार एक वित्त वर्ष में सभी प्राप्तियों और खर्च का ब्यौरा संसद में पेश करती है। इस ब्यौरा यानी लेखा-जोखा को एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट कहते हैं। वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है और अगले साल 31 मार्च को खत्म होता है। उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2022-23 एक अप्रैल 2022 को शुरू हुआ था और 31 मार्च 2023 को समाप्त होगा।

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Fiscal Deficit

फिस्कल का मतलब है पैसा और डेफिसिट का मतलब है कमी। जब सरकार का कुल खर्च उसके कुल इनकम से ज्यादा हो जाती है तो उस स्थिति को फिस्कल डेफिसिट कहा जाता है। इसे आसानी शब्दों में समझने के लिए हम अपने पारिवारिक बजट का इस्तेमाल कर सकते हैं। हम देखते हैं कि किसी महीने में हमारे परिवार का खर्च हमारी आमदनी से ज्यादा हो जाती है। अतिरिक्त खर्च को पूरा करने के लिए हमें उधार लेना पड़ता है। इसी तरह फिस्कल डेफिसिट की स्थिति में सरकार को आमदनी से ज्यादा खर्च के लिए उधार लेना पड़ता है।

Budget Estimates

बजट में अगले वित्त वर्ष के लिए हर मंत्रालय के खर्च का अनुमान शामिल होता है। उसी के हिसाब से केंद्र सरकार उनके लिए बजट आवंटन करती है।

Revised Estimates

छह महीने के बाद वास्तविक खर्च को देखते हुए बजट में लगाए गए खर्च के अनुमान को संशोधित किया जाता है। इससे संसोधित अनुमान कहा जाता है। इसमें साल के बचे छह महीने में एक्सपेंडिचर और रिसीट्स के अनुमान के हिसाब से बजट अनुमान में बदलाव किया जाता है।

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Repo Rate

रेपो का मतलब है रिपर्चेज ऑफ सिक्योरिटीज। सरकारी सिक्योरिटीज को गिरवी रखकर कॉमर्शियल बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। RBI बैंकों को जिस रेट पर यह कर्द देता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है।

Consolidated Fund

सरकार के सभी खर्च इस फंड (Consolidated Fund) से किए जाते हैं। सरकार के सभी रेवेन्यू इसी फंड में आते हैं। इसी फंड का इस्तेमाल अपने खर्च के लिए करती है। सिर्फ असाधारण तरह के खर्च इस फंड से नहीं किए जाते हैं। आपदा प्रबंधन के लिए होने वाला खर्च इसका एक उदाहरण है। संसद की मंजूरी के बगैर सरकार इस फंड का इस्तेमाल अपने खर्च के लिए नहीं कर सकती।

Finance Bill

फाइनेंस बिल टैक्स सिस्टम में होने वाले किसी तरह के बदलाव का प्रस्ताव है।  इसे सिर्फ लोकसभा में पेश किया जा सकता है। लोकसभा की मंजूरी के बाद इसे राज्यसभा में भेजा जाता है। संसद में इसके पारित होने के बाद ही टैक्स के नियमों में किसी तरह का बदलाव प्रभावी होगा।

Direct and Indirect Taxes

डायरेक्ट टैक्सेज ऐसे टैक्स हैं जिसे इंडिविजुअल और कॉरपोरेट की आय पर लगाया जाता है जैसे कि इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स । इनडायरेक्ट टैक्सेज ऐसे टैक्स हैं जिसे गुड्स और सर्विसेज पर लगाया जाता है जैसे कि जीएसटी, कस्टम ड्यूटी इत्यादि। कंज्यूमर इसका भुगतान तब करता है, जब वह कोई वस्तु खरीदता है या सेवा का इस्तेमाल करता है।

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Customs duty

कस्टम ड्यूटी को गुड्स के आयात-निर्यात पर लगाया जाता है। यह एक प्रकार का इनडायरेक्ट टैक्स है और इसका भार कंज्यूमर पर पड़ता है।

Revenue Deficit

रेवेन्यू रिसीट्स से ज्यादा रेवेन्यू एक्सपेंडिचर होने की स्थिति में रेवेन्यू डेफिसिट होता है। इसका मतलब है कि सरकार की कमाई से इसके हर दिन के कामकाज नहीं हो पा रहे हैं।

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