Budget 2023: एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट (Edelweiss Asset Management)के त्रिदीप भट्टाचार्य का कहना है कि एडलवाइस ने इंडियन आईटी सर्विस स्टॉक से अपनी अंडरवेट पोजीशन घटा दी है। उनका मानना है कि इस सेक्टर के चुनिंदा शेयरों में आगे हमें अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। आगामी बजट पर बात करते हुए एडलवाइस के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफीसर इक्विटीज त्रिदीप भट्टाचार्य ने आगे कहा कि इस बजट में फिस्कल कंसोलीडेशन के अलावा निवेशकों की नजर तीन और अहम फैक्टर्स पर होगी।
मनी कंट्रोल से बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 2023 का बजट स्पेशल बजट होगा। ये 2024 में होने वाले आम चुनाव के पहले का आखिरी पूर्ण बजट होगा। इतिहास पर नजर डालें तो इलेक्शन के पहले के साल के बजट में अक्सर पॉपुलिस्ट देखने को मिलते हैं। हालांकि साल 2018 में ऐसा देखने को नहीं मिला था। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 1 फरवरी को आने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फिस्कल कंसोलिडेशन, रिफॉर्म, रेनेव्यू बढ़ाने और ग्रोथ पर होने वाले खर्च को बढ़ाने के बीच संतुलन साधती नजर आएंगी।
निवेशकों का फोकस 3 अहम फैक्टर पर होगा
उन्होंने आगे कहा कि इस बजट में इक्विटी निवेशकों का फोकस 3 अहम फैक्टर पर होगा। इनमें से पहला है फिस्कल कंसोलिडेशन। सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय घाटे को वित्त वर्ष 2026 तक जीडीपी के 4.5 फीसदी तक होना चाहिए। निवेशकों की नजर होगी कि सरकार अपने लक्ष्य के लिए इस बजट में क्या कर सकती है। इसके अलावा बजट में विनिवेश के टारगेट और इसमें तेजी लाने के लिए क्या किया जाता है, इस पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। रूरल डिमांड को बढ़ावा देने के लिए और पीएलआई स्कीम के विस्तार पर सरकार क्या निर्णय लेती है, इस पर भी बाजार की नजर रहेगी।
2023 में बाजार में किसी उछाल के पहले ग्लोबल मंदी के दबाव दिखेगा
बाजार के बारे में बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 2023 में बाजार में किसी उछाल के पहले हमें ग्लोबल मंदी के दबाव का सामना करना होगा। कैलेंडर ईयर 2023 के पहले 3 या 6 महीनों में हमें बाजार पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर देखने को मिलेगा। एक बार इस असर के खत्म हो जाने के बाद कैलेंडर ईयर के दूसरी तिमाही के बाद हमें दुनिया भर की इकोनॉमी निचले स्तरो से सुधरती नजर आएंगी। जिसका असर भारत की इकोनॉमी और बाजार पर भी देखने को मिलेगा।
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