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Budget Stocks: बजट में मिडिल क्लास को मिला तोहफा, तो इन शेयरों में लग सकते हैं पंख

Budget Stocks: ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सरकार खपत बढ़ाने के लिए इस बजट में मिडिल क्लास को कई तरह के राहत दे सकती है। इसमें टैक्स की कटौती भी शामिल है, जिससे उनके पास खर्च करने के लिए अधिक राशि बचेगी। अगर यह राहत दी जाती है तो 15 से 20 लाख रुपये तक की सालाना कमाई वाले मिडिल क्लास व्यक्तियों को काफी फायदा हो सकता है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Jun 28, 2024 पर 6:26 PM
Budget Stocks: बजट में मिडिल क्लास को मिला तोहफा, तो इन शेयरों में लग सकते हैं पंख
Budget Stocks: टैक्स छूट मिलने से कंज्यूमर्स तमाम उत्पादों की खरीदारी में पहले से अधिक खर्च करेंगे

Budget Stocks: कोरोना महामारी के बाद से भारत की आर्थिक ग्रोथ K-आकार की रही है। यानी की आर्थिक असमानताएं बढ़ी हैं। साथ ही महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने से कंज्मप्शन पर भी काफी असर पड़ा है। हालांकि प्रीमियम सेगमेंट्स का प्रदर्शन इस दौरान ठीक-ठाक रहा है। जीडीपी डेटा भी यही बताता है सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर ही ग्रोथ का असली इंजन रहा है, जबकि खपत में कमी जारी है। इन सब स्थितियों को देखते हुए ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सरकार खपत बढ़ाने के लिए इस बजट में मिडिल क्लास को कई तरह के राहत दे सकती है। इसमें टैक्स की कटौती भी शामिल है, जिससे उनके पास खर्च करने के लिए अधिक राशि बचेगी।

अभी तक जो चर्चा चल रही है, उसके मुताबिक स्टैंडर्ड डिडक्शन को नई टैक्स रिजीम के तहत बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है, जो अभी 50,000 रुपये है। वहीं टैक्स स्लैब से छूट की न्यूनतम सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा सकता है। नई टैक्स रिजीम के तहत फिलहाल 7.5 लाख रुपये तक की ग्रॉस इनकम वाले व्यक्ति को टैक्स का भुगतान नहीं करना पड़ता है। हालांकि स्टैंडर्ड डिडक्शन, न्यूनतम टैक्स स्लैब और सेक्शन 87A में बदलाव के साथ इस सीमा के बढ़कर 10 लाख रुपये तक जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

अगर यह राहत दी जाती है तो 15 से 20 लाख रुपये तक की सालाना कमाई वाले मिडिल क्लास व्यक्तियों को काफी फायदा हो सकता है।

मिडिल क्लास के लोगों की जेब में अधिक पैसा आने का मतलब है कि वे तमाम उत्पादों को खरीदारी में पहले से अधिक खर्च करेंगे। इससे कई कैटेगरी के उत्पादों की खपत बढ़ सकती है। इसमें भी गैर-जरूरी उत्पादों की खपत अधिक बढ़ने का अनुमान है। इससे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), डॉबर और इमामी जैसी FMCG कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से बिक्री के मामले में संघर्ष कर रही हैं।

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