यूनियन बजट से शेयरों के सालाना रिटर्न का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कैपिटलमाइंड की स्टडी में यह बताया गया है। इस स्टडी में कहा गया है कि सीएनएक्स500 इंडेक्स का 2000 से बजट के दिन मीडियन रिटर्न -0.1 फीसदी रहा है। सबसे शानदार 4.1 फीसदी रिटर्न 1 फरवरी, 2021 को देखने को मिला। सबसे खराब -5.4 फीसदी का रिटर्न 6 जुलाई, 2009 को मिला। यह स्टडी बजट के ऐलान के करीब मार्केट के विहेवियर पर आधारित है।
बजट से पहले निवेश में सावधानी
इस स्टडी के मुताबिक, निवेशक बजट के आसपास के दिनों में निवेश में सावधानी बरतते हैं। वे बजट से एक हफ्ते पहले मार्केट में अपना एक्सपोजर घटा देते हैं और बजट पेश होने के एक हफ्ते बाद दोबारा मार्केट में एंट्री लेते हैं। बजट से एक हफ्ते पहले और एक महीने पहले मार्केट का मीडियन रिटर्न क्रमश: -1.4 फीसदी और -2.2 फीसदी रहा है। बजट से एक दिन पहले निवेश करने पर एक महीने बाद निगेटिव रिटर्न की संभावना 54 फीसदी रहती है।
बजट के बाद निवेश में दिलचस्पी
कैपिटलमाइंड की स्टडी में बताया गया है कि बजट पेश होने से एक हफ्ते पहले और एक हफ्ते बाद मार्केट के विहेवियर को देखने से निवेशकों के व्यवहार की स्पष्ट झलक मिलती है। इवेस्टर्स अनिश्चितता की वजह से बजट से पहले मार्केट में अपना एक्सपोजर घटाते हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे में करीब 63 फीसदी बार निगेटिव रिटर्न देखने को मिला है। बजट पेश होने के बाद वे बाजार में दोबारा आते हैं। ऐसे में 62 बार उन्हें पॉजिटिव रिटर्न मिला है।
स्टडी के लिए कई सालों का विश्लेषण
इस स्टडी के लिए कैपिटलमाइंड ने कई साल के बजट का एनालिसिस किया है। इसमें मार्केट पर बजट के असर की स्टडी की गई है। उदाहरण के लिए 2003 में NDA सरकार ने डेफिसिट घटाने के लिए नए टैक्स का ऐलान किया था। तब बजट के दिन CNX500 0.5 फीसदी चढ़ा था। लेकिन, एक महीने बाद 6 फीसदी गिर गया था। एक साल बाद यह डबल हो गया था। दूसरा उदाहरण 2018 का है। तब पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का ऐलान किया था। तब बजट के दिन CNX500 में कोई बदलाव नहीं हुआ। लेकिन एक महीने बाद यह 4.6 फीसदी गिर गया।
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लंबी अवधि के निवेश पर फोकस करने की सलाह
Capitalmind के रिसर्च हेड अनूप विजयकुमार ने कहा कि निवेशकों को बजट में होने वाले ऐलान से मार्केट में शॉर्ट टर्म मूवमेंट से मुनाफा कमाने की कोशिश करने की जगह लंबी अवधि के निवेश पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट से उम्मीदों को लेकर बाजार में उतारचढ़ाव दिख सकता है, लेकिन लंबी अवधि में बाजार की चाल कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबी अवधि के निवेशकों को बजट से उम्मीदों के आधार पर बड़े निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए।