ब्रोकरेज फर्मों को यूनियन बजट से कई उम्मीदें हैं। हालांकि, उन्हें सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स बढ़ने की चिंता भी है। उनका मानना है कि अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों में किसी तरह का बदलाव करती हैं तो उसका मार्केट के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर खराब असर पड़ेगा। बाजार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अगर एसटीटी बढ़ाया जाता है तो इससे वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। इसकी वजह यह है कि ट्रेडर्स अभी जिस तरह से फ्रीक्वेंट्ली ट्रेड करते हैं, उस तरह से एसटीटी बढ़ने के बाद नहीं करेंगे। दरअसल, एसटीटी बढ़ने के बाद ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी।
