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Union Budget 2024-25 : ब्रोकरेज फर्मों को सता रहा एसीटीटी और एलटीसीजी टैक्स बढ़ने का डर, जानिए क्या है इसकी वजह

India Budget 2024: ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि एसटीटी बढ़ने का असर ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पढ़ेगा। पिछले कुछ तिमाहियों में डीमैट अकाउंट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा है। ट्रेडिंग पर कमीशन से ब्रोकरेज फर्मों की कमाई होती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 19, 2024 पर 11:29 AM
Union Budget 2024-25 : ब्रोकरेज फर्मों को सता रहा एसीटीटी और एलटीसीजी टैक्स बढ़ने का डर, जानिए क्या है इसकी वजह
Budget 2024 expectations: अभी ऑप्शन की बिक्री पर 0.0625 फीसदी एसटीटी लगता है, जिसका पेमेंट सेलर (Seller) करता है।

ब्रोकरेज फर्मों को यूनियन बजट से कई उम्मीदें हैं। हालांकि, उन्हें सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स बढ़ने की चिंता भी है। उनका मानना है कि अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों में किसी तरह का बदलाव करती हैं तो उसका मार्केट के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर खराब असर पड़ेगा। बाजार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अगर एसटीटी बढ़ाया जाता है तो इससे वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। इसकी वजह यह है कि ट्रेडर्स अभी जिस तरह से फ्रीक्वेंट्ली ट्रेड करते हैं, उस तरह से एसटीटी बढ़ने के बाद नहीं करेंगे। दरअसल, एसटीटी बढ़ने के बाद ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी।

लिक्विडिटी में आ सकती है गिरावट

ट्रेडिंग कॉस्ट पहले से ही 1 अक्टूबर से बढ़ने की संभावना है, क्योंकि इस तारीख से यूनिफॉर्म एक्सचेंज फी रीजीम लागू हो जाएगी। एसटीटी का मतलब Securities Transaction Tax है, जो लिस्टेड कंपनियों के शेयरों को खरीदने और बेचने पर लगता है। मार्केट से जुड़े एक सूत्र ने बताया, "अगर STT बढ़ाया जाता है तो यह ज्यादातर F&O सेगमेंट के लिए होगा न कि कैश सेगमेंट के लिए।" हालांकि, उन्होंने यह माना का एसटीटी बढ़ने से मार्केट में लिक्विडिटी घटेगी। इसकी वजह यह है कि मार्केट की लिक्विडिटी में इंट्रा-डे ट्रेडर्स का काफी योगदान होता है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ने का भी पड़ेगा असर

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