Budget 2024: लोकसभा चुनाव से पहले डिसइनवेस्टमेंट हुआ धीमा, FY24 का लक्ष्य फिर चूकने की आशंका

Budget 2024: देश में अगले साल अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने हैं। रेटिंग एजेंसी फिच ने इस महीने की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि मौजूदा नरेंद्र मोदी प्रशासन के 2024 में चुनाव के बाद सत्ता में दोबारा लौटने की सबसे अधिक संभावना है

अपडेटेड Dec 25, 2023 पर 2:43 PM
Budget 2024: चालू वित्त वर्ष 2023-24 के डिसइनवेस्टमेंट टारगेट से फिर चूकने की आशंका है

Budget 2024: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव 2024 नजदीक आने के साथ ही सरकार ने अपनी निजीकरण की कार्रवाई लगभग रोक दी है। सरकार अब शेयर बाजारों में माइनॉरिटी स्टेक हिस्सेदारी बेचने का विकल्प चुना है। कुछ चुनिंदा घरानों को हिस्सेदारी बेचने के विपक्षी दलों के आरोपों के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि, इसके परिणामस्वरूप चालू वित्त वर्ष 2023-24 के डिसइनवेस्टमेंट टारगेट (disinvestment target) से फिर चूकने की आशंका है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) और कॉनकॉर जैसी बड़ी निजीकरण योजनाएं पहले से ही ठंडे बस्ते में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सार्थक निजीकरण अप्रैल/मई के आम चुनाव के बाद ही हो सकता है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में 51,000 करोड़ रुपये की बजट राशि में से करीब 20 प्रतिशत यानी 10,049 करोड़ रुपये IPO (Initial Public Offering) और OFS (Offer For Sale) के माध्यम से अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए एकत्र किए गए।

SCI, NMDC स्टील लिमिटेड, BEML, HLL लाइफकेयर और IDBI बैंक सहित कई केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (CPSEs) की रणनीतिक बिक्री चालू वित्त वर्ष में पूरी होने वाली है। हालांकि, अधिकांश CPSEs के संबंध में मुख्य एवं गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की विभाजन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। इसलिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित करने में देरी हुई है। कुल मिलाकर करीब 11 लेनदेन हैं जो वर्तमान में DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) में लंबित हैं।


एक्सपर्ट की राय

एक मार्केट एक्सपर्ट ने पीटीआई से कहा, "रणनीतिक डिसइनवेस्टमेंट निर्णय राजनीतिक आवश्यकताओं से संचालित हो रहे हैं। चुनाव नजदीक होने के कारण हमें रणनीतिक बिक्री के मामले में कोई हलचल की उम्मीद नहीं है।" बता दें कि देश में अगले साल अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने हैं। रेटिंग एजेंसी फिच ने इस महीने की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि मौजूदा नरेंद्र मोदी प्रशासन के 2024 में चुनाव के बाद सत्ता में दोबारा लौटने की सबसे अधिक संभावना है।

शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में PSU (Public Sector Undertaking) की हिस्सेदारी की बिक्री गति हाल ही में धीमी हो गई है। 2021-2022 की तुलना में 2023 में प्रमुख PSU हिस्सेदारी बिक्री की संख्या कम रही है।

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श्रीवास्तव ने आगे कहा, "विस्तारित नियामक प्रक्रियाओं, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, कुछ क्षेत्रों में निजीकरण का राजनीतिक विरोध और 2024 के आम चुनाव से पहले सरकारी प्राथमिकताओं में बदलाव सहित विभिन्न कारकों के कारण विनिवेश की प्रवृत्ति में हाल ही में गिरावट देखी गई है।"

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