Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को पेश हो रहे अंतरिम बजट में खपत (Consumption) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के अलावा महंगाई को नीचे लाने के उपायों को जारी रखेंगी। ऐसा अनुमान विशेषज्ञों ने जताया है। यह सीतारमण का लगातार छठा बजट होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि खपत को बढ़ावा देने का एक तरीका लोगों के हाथों में अधिक पैसा देना है। ऐसा करने का एक संभावित तरीका टैक्स स्लैब में बदलाव करना या स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी के जरिये लोगों पर टैक्स का बोझ कम करना हो सकता है। एक अन्य प्रस्ताव ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 'मनरेगा' के तहत धनराशि बढ़ाने और किसानों के लिए अधिक भुगतान से संबंधित है।
विशेषज्ञों ने कहा कि आम चुनाव से पहले खपत को बढ़ावा देने के सीतारमण के प्रयास के तहत महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकते हैं। आमतौर पर आम चुनावों से पहले लोकसभा में पेश किए जाने वाले अंतरिम बजट में नए टैक्स प्रपोजल्स या नई स्कीम्स शामिल नहीं होती हैं। चुनावों से पहले बजट में बड़ी घोषणाएं नहीं की जा सकती हैं।
तत्काल समाधान की जरूरत वाली समस्याओं पर आ सकते हैं प्रस्ताव
अंतरिम बजट में सरकार वित्त वर्ष 2024-25 के 4 माह के लिए अपने खर्चों को पूरा करने के लिए संसद से इजाजत मांगेगी। इसमें तत्काल ऐसी आर्थिक समस्याओं के समाधान के प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं, जिनके लिए चार महीने तक इंतजार नहीं किया जा सकता। चुनावों के बाद, नई सरकार बनने के बाद जुलाई माह में पूर्ण बजट पेश किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अर्थव्यवस्था में सुस्त खपत मांग से संबंधित मुद्दों का समाधान करने की तत्काल जरूरत है।
निम्न आय वर्ग पर मूल्यवृद्धि की सबसे ज्यादा मार
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, Deloitte India के पार्टनर रजत वाही ने कहा कि कंपनियों ने FMCG और रोजमर्रा के इस्तेमाल के ज्यादातर प्रोडक्ट्स के दाम पिछली 8-10 तिमाहियों में बढ़ाए हैं। कंपनियों को उत्पादन लागत में बढ़ोतरी की वजह से यह कदम उठाना पड़ा है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के प्रभाव, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, महंगाई, ऊंची ब्याज दर..इन सभी चीजों से निम्न आय वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं। सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही यह स्थिति नहीं है, बल्कि शहरों क्षेत्रों के गरीब वर्ग को भी इसकी मार झेलनी पड़ रही है। वाही ने कहा कि मूल्यवृद्धि का बड़ा प्रभाव समाज के गरीब वर्ग पर पड़ रहा है क्योंकि कर्ज चूक या डिफॉल्ट की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।
आगे कहा कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि उतनी नहीं है जितना सरकार मानकर चल रही थी। सरकार का इरादा कृषि आय को दोगुना करने का था लेकिन महंगाई की वजह से इसे अभी तक हासिल नहीं किया जा सका है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के एडवांस एस्टिमेट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 1.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 2022-23 में यह 4 प्रतिशत रही थी।
दबाव वाले वर्गों के लिए कदम उठाना जरूरी
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेन्द्र कुमार पंत का कहना है कि वोट-ऑन-अकाउंट का मुख्य उद्देश्य सरकार को अगले वित्त वर्ष के चार महीनों के लिए वेतन, मजदूरी, ब्याज और कर्ज भुगतान के लिए पैसा खर्च करने की अनुमति देना है। लेकिन समाज के कुछ वर्ग दबाव में है। क्या हम उनके लिए कोई कदम उठाने को चार-पांच माह और इंतजार कर सकते हैं। यदि हम पांच महीने बाद कुछ करेंगे, तो उनकी स्थिति और खराब हो जाएगी। अंतरिम बजट में इस वर्ग के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं।
खपत बढ़ाने के लिए नई कर व्यवस्था को बना सकते हैं और आकर्षक
Deloitte India के पार्टनर संजय कुमार ने कहा, ‘खपत बढ़ाने का एक प्रमुख तरीका नई कर व्यवस्था में कुछ बदलाव कर इसे अधिक आकर्षक बनाना हो सकता है। इससे करदाताओं के हाथों में अधिक पैसा रहेगा। बजट में हमेशा टैक्स स्लैब में बदलाव का मामला रहता है। सरकार पर संभवत: होम लोन के ब्याज पर डिडक्शंस को नई कर व्यवस्था में शामिल करने का दबाव होगा।’ सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा करदाता नई कर व्यवस्था को अपनाएं। नई कर व्यवस्था में टैक्स की कम दर के साथ कुछ ही छूट और डिडक्शन शामिल हैं। वहीं पुरानी कर व्यवस्था के तहत कई तरह के टैक्स डिडक्शंस का फायदा लिया जा सकता है।