केंद्र की नई एनडीए सरकार के पहले बजट पर करीबी नजरें लगी हैं। माना जा रहा है कि गठबंधन सरकार का असर यूनियन बजट पर पड़ सकता है। सरकार का झुकाव वेल्फेयर स्कीम्स पर बढ़ सकता है। लेकिन, अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स की राय इससे उलट है। उसका कहना है कि यूनियन बजट में सरकार पूंजीगत खर्च में किसी तरह की कमी नहीं करेगी। साथ ही सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन के मामले में भी किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगी। उसने 8 जुलाई को जारी अपनी रिपोर्ट में यूनियन बजट को लेकर अपने अनुमान के बारे में बताया है।
सरकार का पूंजीगत खर्च नहीं घटेगा
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के फिस्कल डेफिसिट के 5.1 फीसदी के टारगेट को बनाए रखेगी। FY26 के फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को सरकार घटाकर 4.5 फीसदी कर सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वेल्फेयर स्कीम पर खर्च के लिए सरकार अपने पूंजीगत खर्च में कमी नहीं करेगी, क्योंकि सरकार को RBI की तरफ से बतौर डिविडेंड काफी ज्यादा पैसे मिले हैं।
पूंजीगत खर्च बढ़ाने का अच्छा असर
अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म ने कहा है, "FY21-FY24 के बीच केंद्र सरकार के पूंजीगत खर्च की सीएजीआर करीब 31 फीसदी रही है। इससे इकोनॉमी ग्रोथ बढ़ी है। उधर, FY22 से वेल्फेयर स्कीम पर खर्च कंट्रोल में रहा है।" उसका मानना है कि सरकार जिस तरह से फिस्कल कंसॉलिडेशन के टारगेट पर फोकस कर रही है, उससे लगता है कि FY25 में भी फिस्कल पॉलिसी ग्रोथ को बढ़ावा देने वाली होगी।
2024 के लॉन्ग टर्म विजन पर हो सकता है फोकस
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रोथ को बढ़ावा के लिहाज से फिस्कल पॉलिसी के मामले में सरकार के पास ज्यादा गुंजाइश नहीं बची है। इसकी वजह यह है कि सरकार का कर्ज ज्यादा बना हुआ है। उधर, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने का पॉजिटिव असर ग्रोथ पर दिखा है। इसमें कमी लाना अब मुश्किल होगा। इसकी जगह यूनियन बजट का फोकस 2047 के लॉन्ग टर्म विजन पर हो सकता है। इसके लिए सरकार को मंहगाई को कंट्रोल में करते हुए रोजगार के मौके बढ़ाने पर होगा।
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रोजगार बढ़ाने के उपायों पर होगा फोकस
ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें उम्मीद है कि फिस्कल टारगेट से काफी आगे जाएगा और उम्मीद है कि इसमें 2047 को ध्यान में रख लंबी अवधि की सरकार की पॉलिसी को लेकर बयान हो सकते हैं। ज्यादा श्रम का इस्तेमाल करने वाले सेक्टर पर फोकस बढ़ाकर रोजगार के मौके पैदा करने पर फोकस हो सकता है।"