Budget 2024-25: भारत सरकार कुछ कैटेगरीज के व्यक्तियों के लिए पर्सनल इनकम टैक्स रेट्स को कम करने पर विचार कर रही है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत को बढ़ावा मिल सकता है। यह जानकारी रॉयटर्स को दो सरकारी सूत्रों से मिली है। जुलाई के आखिर में नरेंद्र मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करेगी। इसमें आयकर दरों में राहत की घोषणा की जा सकती है। मतदान के बाद किए गए सर्वेक्षण से पता चला है कि मतदाता महंगाई, बेरोजगारी और घटती आय को लेकर चिंतित हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2023-24 में दुनिया को पछाड़ते हुए 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, लेकिन खपत उससे आधी दर से बढ़ी है। पीएम मोदी ने एनडीए सरकार बनाने का दावा करते हुए कहा था कि उनका प्रशासन, मध्यम वर्ग की बचत बढ़ाने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने पर फोकस करेगा। रॉयटर्स के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि पर्सनल इनकम टैक्स रेट में कटौती से अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ सकती है और मध्यम वर्ग के लिए बचत में इजाफा हो सकता है।
15 लाख रुपये सालाना आय वालों को मिल सकती है कुछ छूट
एक सूत्र के मुताबिक, जिन व्यक्तियों की सालाना आय 15 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें टैक्स में कुछ छूट मिल सकती है। छूट की लिमिट को अभी निर्धारित किया जाना है। 2020 में शुरू की गई नई टैक्स व्यवस्था में बदलाव किए जा सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत 15 लाख रुपये तक की वार्षिक टैक्सेबल इनकम पर 5-20 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है, जबकि 15 लाख रुपये से अधिक की टैक्सेबल इनकम पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है। रॉयटर्स के अनुसार, एक अन्य सोर्स का कहना है कि जब किसी व्यक्ति की वार्षिक आय 3,00,000 रुपये से बढ़कर 15 लाख रुपये हो जाती है, तो पर्सनल इनकम टैक्स की दर 6 गुना बढ़ जाती है, जो काफी अधिक है।
10 लाख रुपये वार्षिक आय वालों के लिए भी हो सकता है ऐलान
कहा जा रहा है कि सरकार 10 लाख रुपये की वार्षिक आय के लिए पर्सनल इनकम टैक्स रेट को कम करने पर भी विचार कर सकती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत 30 प्रतिशत की उच्चतम टैक्स रेट के दायरे में वाली आय के लिए एक नई थ्रेसहोल्ड पर चर्चा की जा रही है। सोर्स के मुताबिक, टैक्स में कमी के चलते सरकार को टैक्स से आय में होने वाले किसी भी नुकसान की आंशिक रूप से भरपाई इस श्रेणी के इनकम अर्नर्स की खपत में वृद्धि से की जा सकती है। सरकार मार्च 2025 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में जीडीपी के 5.1 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बना रही है।