सरकार इस महीने के आखिर में पेश होने वाले बजट में रूरल हाउसिंग के लिए सब्सिडी बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। न्यूज एजेंसी रायटर्स ने कहा है कि सरकार सरकार एक साल पहले के मुकाबले सब्सिडी 50 फीसदी बढ़ाकर 6.5 अरब डॉलर से ज्यादा कर सकती है। सूत्रों ने बताया है कि ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ती महंगाई ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है। उधर, किसानों की इनकम उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है। अगर रूरल हाउसिंग के लिए सब्सिडी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो यह 2016 में रूरल हाउसिंग प्रोग्राम शुरू होने के बाद से सबसे ज्यादा सब्सिडी होगी। मनीकंट्रोल इस रिपोर्ट को वेरिफाय नहीं कर सका है।
ग्रामीण इलाकों में डिमांड कमजोर
रायटर्स ने कहा है कि सरकार ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना चाहती है। वह रोजगार पर भी फोकस बढ़ाना चाहती है। इससे कृषि से जुड़े लाखों युवाओं को फायदा होगा। मैन्युफैक्चरिंग के मौके नहीं होने से बड़ी संख्या में युवा कृषि कार्य से जुड़े रहते हैं। अगर उन्हें रोजगार के अतिरिक्त मौके मिलते हैं तो इससे उनकी आमदनी बढ़ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में डिमांड की ग्रोथ सुस्त रही है।
हाउसिंग लोन कंपनियों के शेयरों में उछाल
रूरल हाउसिंग के लिए सब्सिडी बढ़ने के अनुमान से 4 जुलाई को HUDCO के शेयरों में 9 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला। Aadhar Housing Finance और GIC Housing Finance के शेयरों में भी करीब 4.5 फीसदी की तेजी आई। सरकार ने पीएम आवास योजना (PMY-R) के तहत आने वाले सालों में ग्रामीण इलाकों में अतिरिक्त 2 घर बनाने का टारगेट तय किया है। पिछले 8 साल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को 2.6 घर सरकार दे चुकी है।
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ग्रामीण इलाकों पर खर्च बढ़ाने की सलाह
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इस महीने के तीसरे हफ्ते में फुल बजट पेश कर सकती हैं। इकोनॉमिस्ट्स और इंडस्ट्री लीडर्स ने सरकार को कंज्यूमर डिमांड बढ़ाने के लिए ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा खर्च करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि इकोनॉमिक ग्रोथ तो बढ़ी है, लेकिन उसके हिसाब से कंजम्प्शन नहीं बढ़ा है। सूत्रों ने बताया है कि ग्रामीण इलाकों में सरकार 55000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का ऐलान कर सकती है। यह पिछले वित्त वर्ष के 32000 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।