Budget 2024: सरकार का 25% पैसा सिर्फ इंटरेस्ट चुकाने पर खर्च हो जाता है, जानिए इसे घटाना क्यों जरूरी है

Budget 2024-25: सरकार ने पिछले कुछ सालों में फिस्कल कंसॉलिडेशन यानी अपनी वित्तीय स्थिति ठीक करने पर फोकस बढ़ाया है। इसके बावजूद इंटरेस्ट पर होने वाले उसके खर्च में ज्यादा कमी नहीं आई है। अगर सरकार ज्यादा कर्ज लेगी तो उसे ज्यादा इंटरेस्ट भी चुकाना पड़ेगा

अपडेटेड Jul 05, 2024 पर 9:47 AM
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1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट के मुताबिक, सरकार को इंटरेस्ट पेमेंट पर 11.9 लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

इंडिया जैसे विकासशील देश में आम तौर पर फिस्कल डेफिसिट ज्यादा होता है। इसकी वजह यह है कि सरकार का खर्च रेवेन्यू से ज्यादा होता है। इस गैप का पूरा करने के लिए सरकार मार्केट से कर्ज लेती है। इस कर्ज पर वह इंटरेस्ट चुकाती है। यह इंटरेस्ट पेमेंट भी एक तरह का खर्च है और इसे अनप्रोडक्टिव एक्सपेंडिचर माना जाता है। इसीलिए सरकार इंटरेस्ट पर होने वाले इस खर्च को कंट्रोल में रखने की कोशिश करती है। ऐसा तभी होगा जब सरकार मार्केट से कम कर्ज लेगी। सरकार के कर्ज लेने का असर इंटरेस्ट पेमेंट पर तो पड़ता ही है साथ ही इंटरेस्ट रेट साइकिल और बॉन्ड्स पर भी इसका असर पड़ता है।

सरकार इंटरेस्ट पर होने वाले खर्च को घटाने में नाकाम रही है

इंडिया में सरकार इंटरेस्ट पर होने वाले खर्च को कंट्रोल में रखने में नाकाम रही है। 2020 में कोविड की महामारी शुरू होने से पहले सरकार के कुल खर्च में इंटरेस्ट की हिस्सेदारी करीब एक-चौथाई थी। महामारी के दौरान इकोनॉमी को सहारा देने के लिए सरकार को खर्च बढ़ाना पड़ा। RBI ने इंटरेस्ट रेट (Repo Rate) में भी कमी की। इससे बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई। FY25 के अंतरिम बजट (Interim Budget) के अनुमान के आधार पर पिछले महामारी के बाद के बीते पांच साल में सरकार के कुल खर्च में इंटरेस्ट की हिस्सेदारी औसतन 22 फीसदी रही है।


फिस्कल कंसॉलिडेशन में इंटरेस्ट पेमेंट पर फोकस करने की जरूरत

सरकार के कुल खर्च में इंटरेस्ट की हिस्सेदारी थोड़ी कम हुई है। लेकिन, यह अब भी ज्यादा है। सरकार के कुल खर्च में अब भी इंटरेस्ट पहले पायदान पर है। यह हर साल होने वाला खर्च है। साथ ही यह अनप्रोडक्टिव एक्सपेंडिचर भी है। इसलिए सरकार को फिस्कल कंसॉलिडेशन में इस खर्च (इंटरेस्ट) को घटाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दरअसल, कुल खर्च में इंटरेस्ट की हिस्सेदारी के औसत आंकड़ों से इसकी सही तस्वीर नहीं मिलती है।

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FY25 में इंटरेस्ट पर 11.9 लाख करोड़ खर्च का अनुमान

कोविड की महामारी के बाद FY21 और FY22 के सालों में इंटरेस्ट पेमेंट काफी बढ़ा था, जबकि कर्ज लेने की वेटेड एवरेज कॉस्ट घटकर 17 साल के निचले स्तर पर आ गई थी। 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट के मुताबिक, सरकार को इंटरेस्ट पेमेंट पर 11.9 लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। यह सरकार के कुल खर्च का करीब 25 फीसदी है।

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