देश में 1 फरवरी 2024 को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश होने जा रहा है। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का 6ठा और मोदी सरकार का, पहले और दूसरे कार्यकाल को मिलाकर 12वां बजट होगा। 2024 में आम चुनाव होने के चलते 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया जाने वाला है। यह एक अस्थायी बजट होता है, जिसमें चुनाव के बाद नई सरकार के सत्ता संभालने तक के महीनों के लिए आय और व्यय का खाका होता है। नई सरकार बनने के बाद पूर्ण बजट पेश किया जाता है। इस साल अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावों के बाद नई सरकार जुलाई माह में पूर्ण बजट पेश करेगी। देश के बजट को समझने के लिए आपका कुछ खास टर्म्स से वाकिफ होना जरूरी है...
कैपिटल बजट में सरकार के सभी एसेट और देनदारियां शामिल रहती हैं। कैपिटल बजट को दो हिस्सों में बांटा जाता है- कैपिटल रिसीप्ट और कैपिटल एक्सपेंडिचर।
कैपिटल रिसीप्ट्स: कैपिटल रिसीप्ट्स के तहत ब्याज पेमेंट्स समेत सरकार के कैपिटल एसेट्स के के सभी डेट पेमेंट्स आते हैं।
कैपिटल एक्सपेंडिचर: किसी देश का कैपिटल एक्सपेंडिचर वह कुल रकम है, जिसका इस्तेमाल केंद्र सरकार विकास संबंधी गतिविधियों और उन मशीनरी और एसेट्स को खरीदने के लिए करती है, जिससे इकनॉमी को बढ़ावा मिल सके।
फिस्कल डेफिसिट (वित्तीय/राजकोषीय घाटा) का मतलब पिछले फाइनेंशियल ईयर में सरकार के कुल खर्च और कुल रेवेन्यू का अंतर होता है। इस अंतर को दूर करने के लिए सरकार रिजर्व बैंक से उधार लेती है। अंतर को पाटने के लिए इसके अलावा भी कई और उपाय किए जाते हैं।
मंत्रालयों, विभागों, सेक्टरों और योजनाओं के मद में आवंटित अनुमानित फंडों को बजट अनुमान कहा जाता है। इससे तय होता है कि फंड का कितना और कब इस्तेमाल किया जाना है और संबंधित अवधि में कितनी रकम खर्च की जाएगी।
रेवेन्यू के माध्यम से पूरे होने वाले सभी खर्च और सरकार को रेवेन्यू देने वाले सभी सोर्स, रेवेन्यू बजट के तहत आते हैं। रेवेन्यू बजट को दो हिस्सों रेवेन्यू रिसीप्ट और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में बांटा जाता है।
रेवेन्यू रिसीप्ट्स: टैक्स रेवेन्यू और नॉन टैक्स रेवेन्यू के जरिए सरकार को हासिल हुआ पैसा, रेवेन्यू रिसीप्ट्स में आता है। टैक्स रेवेन्यू में इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, एक्साइज ड्यूटी, जीएसटी आदि काउंट होते हैं। वहीं नॉन टैक्स रेवेन्यू में जुर्माने से मिला पैसा, ग्रांट, डोनेशन आदि आते हैं।
रेवेन्यू एक्सपेंडिचर: रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, सरकार के रोज के परिचालनों, सर्विस डिलीवरी, कर्ज पर ब्याज, सब्सिडी को कवर करता है। इसमें ऐसे खर्च आते हैं, जो एसेट क्रिएट नहीं करते हैं।
सरकार नए टैक्स की पॉलिसी शुरू करने के लिए फाइनेंस बिल का इस्तेमाल करती है। इसके तहत मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए इस स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाता है।
डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स
डायरेक्ट टैक्स वैसे टैक्स होते हैं, जो टैक्सपेयर्स से सीधे तौर पर वसूले जाते हैं, मसलन इनकम टैक्स या कॉरपोरेट टैक्स। इस बीच, इनडायरेक्ट टैक्स उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष तरीके से लगाए जाते हैं, मसलन GST, VAT और एक्साइज ड्यूटी।