Budget 2024: काफी दिलचस्प है यूनियन बजट का सफर, जानिए इसके बारे में 10 रोचक बातें

Union Budget 2024: यूनियन बजट का सफर बहुत दिलचस्प रहा है। पिछले दशकों में न सिर्फ बजट पेश होने की तारीख और समय बदला है बल्कि बजट पेश होने का तरीका भी बदला है। बदलते समय के साथ यूनियन बजट भी डिजिटल हो गया है

अपडेटेड Jul 11, 2024 पर 1:27 PM
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Budget 2024-25: अब रेल बजट पेश नहीं होता है। इसे 2017 में यूनियन बजट में शामिल कर दिया गया था।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी। इसके साथ ही वह सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने वाली वित्तमंत्री बन जाएंगी। इस महीने वह सातवीं बार बजट पेश करेंगी। सीतारमण अभी तक छह बार बजट पेश कर चुकी हैं। पूर्व वित्तमंत्री मोरारजी देसाई ने भी छह बार बजट पेश किया था। आइए यूनियन बजट के बारे में 10 दिलचस्प बातें जानते हैं।

1. आजादी के वक्त उथलपुथल की स्थिति के बीच आरके शणमुखम चेट्टी ने आजाद इंडिया का पहला बजट पेश किया था। यह अंतरिम बजट था। तब देश की अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां थीं। देश के सामने खाद्यान्न की कमी, बढ़ता आयात और रोजमर्रा की चीजें की कीमतों में इजाफा जैसी समस्याएं थीं।

2. इंडिया का पहला बजट पेश करने का रिकॉर्ड जेम्स विल्सन के नाम है। वह ईस्ट इंडिया कंपनी के इकोनॉमिस्ट थे। अंग्रेजी शासन के दौरान उन्होंने पहली बार 1860 में इंडिया का बजट पेश किया था।


3. साल 2016 तक यूनियन बजट हर साल फरवरी की अंतिम तारीख को पेश होता था। पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यह परंपरा बदली थी। 2017 से बजट पेश करने की तारीख बदलकर 1 फरवरी हो गई।

4. बजट पेश करने का समय बदलने का श्रेय पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा को जाता है। उन्होंने पहली बार 1999 में फरवरी की अंतिम तारीख को बजट शाम 5 बजे की जगह दिन में 11 बजे पेश किया था। तब से बजट दिन में 11 बजे पेश होता है।

5. सबसे लंबा बजट भाषण का रिकॉर्ड वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के नाम है। उन्होंने 2020 में दो घंटे 42 मिनट तक बजट भाषण दिया था। हालांकि, शब्दों की संख्या के लिहाज से उनका भाषण पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बजट भाषण से छोटा था।

6. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019 में बजट पेश करने के लिए 'बहीखाता' का इस्तेमाल किया था। इससे पहले बजट के लिए ब्रीफकेस का इस्तेमाल होता था। वित्तमंत्री ब्रीफकेस में बजट डॉक्युमेंट्स लेकर लोकसभा पहुंचता था। 2019 से बजट पेश करने के लिए ब्रीफकेस के इस्तेमाल की परंपरा बंद हो गई।

7. बजट तैयार करने की प्रक्रिया में हलवा सेरेमनी को अहम पड़ाव माना जाता है। वित्तमंत्रालय में हलवा सेरेमनी का आयोजन होता है। इस सेरेमनी में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण खुद मौजूद रहती हैं। हलवा सेरेमनी के बाद ही बजट डॉक्युमेंट की प्रिंटिंग शुरू होती है।

8. जीएसटी लागू होने से पहले वित्तमंत्री के बजट भाषण में सबसे ज्यादा निगाहें महंगा और सस्ता होने वाली चीजों पर रहती थीं। जीएसटी लागू होने के बाद अब चीजों के टैक्स में बदलाव का फैसला जीएसटी काउंसिल करती है। इसलिए बजट में महंगी और सस्ती होने वाली चीजों की लिस्ट बहुत छोटी रह गयी है। अब भी कस्टम शुल्क जैसे टैक्स की वजह से कुछ चीजों के दाम में बदलाव का ऐलान बजट में होता है।

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9. अब रेल बजट पेश नहीं होता है। इसे 2017 में यूनियन बजट में शामिल कर दिया गया था। इससे पहले हर साल यूनियन बजट से पहले रेल बजट पेश होता था। रेल मंत्री रेल बजट पेश करता था। इसमें रेलवे की इनकम, खर्च, पूंजीगत खर्च, नई ट्रेन, नई रेल लाइन आदि का ऐलान होता था।

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10. इंडिया में कई प्रधानमंत्री को बजट पेश करना पड़ा है। इसमें पहला नाम जवाहर लाल नेहरू का है। उन्होंने 1958 में यूनियन बजट पेश किया था। उसके बाद इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई और राहुल गांधी ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने बजट पेश किया था।

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