आम परिवारों की तरह सरकार को भी अपने खर्च की प्राथमिकता तय करनी पड़ती है। हर साल सरकार अपने 12 महीने के खर्च का प्लान बनाती है। इसके लिए वह यूनियन बजट पेश करती है। मामला तब थोड़ा जटिल हो जाता है जब साल के खर्च को दो हिस्सों में बांटना पड़ता है। ऐसा हर पांच साल पर होता है, जब देश में लोकसभा चुनाव होता है। फिलहाल, फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं।
