वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के नाम 23 जुलाई को एक रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा। वह लगातार सात बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्तमंत्री बन जाएंगी। अभी छह बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है। निर्मला सीतारमण के बजट से कई उम्मीदें हैं। खासकर मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले महीने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए बजट के बारे में संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि अगला बजट ऐतिहासिक होगा। इसमें इकोनॉमिक और सोशल रिफॉर्म्स के उपाय होंगे। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा मिडिल क्लास को टैक्स रिलीफ की है। सवाल है कि क्या बजट में उनकी यह उम्मीद पूरी होगी? इस उम्मीद के पूरा होने की पांच वजहें हैं:
RBI के बंपर डिविडेंड से सरकार के हाथ में पैसा
आरबीआई ने FY24 के लिए सरकार को 2.1 लाख करोड़ डिविडेंड देने का ऐलान किया है। यह सरकार की उम्मीद से ज्यादा है। इस डिविडेंड से सरकार के पास खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसा है। इससे सरकार को कम कर्ज लेना होगा। इससे मिडिल क्लास को टैक्स रिलीफ देने का मौका सरकार के पास है।
सरकार का डायरेक्ट टैक्स क्लेक्शन FY24 में 17.7 फीसदी बढ़कर 19.58 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह सरकार के 18.23 लाख करोड़ रुपये के शुरुआती टारगेट से ज्यााद है। यह 19.45 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से भी ज्यादा है। इसमें पर्सनल इनकम टैक्स में अच्छी ग्रोथ का योगदान है। कुल टैक्स कलेक्शन में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 53.3 फीसदी हो हो गई है।
जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। जून 2020 में ग्रॉस कलेक्शन 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के समान अवधि से 8 फीसदी ज्यादा है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की पहली तिमाही में औसत जीएसटी कलेक्शन 1.86 लाख करोड़ रुपये है। यह 2017 में जीएसटी की शुरुआत के बाद से सबसे ज्यादा है।
FY24 में सरकार का फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 5.6 फीसदी रहा। यह 5.8 फीसदी के संसोधित अनुमान से कम है। फिस्कल डेफिसिट घटने और टैक्स रिसीट उम्मीद से ज्याद रहने से सरकार की वित्तीय सेहत ठीक है। सरकार ने अपने खर्च को भी कंट्रोल में रखने की कोशिश की है। सरकार ने FY25 में फिस्कल डेफिसिट का 5.1 फीसदी टारगेट तय किया है।
इकोनॉमी की स्ट्रॉन्ग ग्रोथ
इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ FY24 में 8 फीसदी से ज्यादा रही है। इस फाइनेंशियल ईयर में ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके पीछ मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी और कंस्ट्रक्शन सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन का अनुमान है। उधर, सरकार भी अपना खर्च बढ़ा रही है। इसका असर इकोनॉमी पर पड़ने की संभावना है। इससे आने वाले सालों में इंडिया के दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी बने रहने की उम्मीद है।