ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (ओबीपीपी) ने निर्मला सीतारमण से कॉर्पोरेट बॉन्ड्स पर टीडीएस हटाने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार को इन प्लेटफॉर्म्स को आरबीआई के रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म से इंटिग्रेट करना चाहिए। उनका मानना है कि बजट में वित्तमंत्री इसका ऐलान कर सकती हैं। इससे कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत बनाने के साथ ही छोटे निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
टीडीएस की वजह से रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी नहीं
इनक्रेड मनी के सीईओ विजय कुप्पा ने कहा, "कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (Corporate Bonds) पर टीडीएस की वजह से रिटेल इनवेस्टर इसमें निवेश में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इससे बॉन्ड (Bonds) जारी करने वाले के लिए भी कंप्लायंस बढ़ जाता है। अगर कॉर्पोरेट बॉन्ड्स पर टीडीएस हटा दिया जाता है तो इनमें निवेश में रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।" एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म के साथ RBI के रिटेल प्लेटफॉर्म को इंटिग्रेट करने से रिटेल इनवेस्टर्स सीधे सरकारी बॉन्ड्स में निवेश कर सकेंगे।
ओबीपी के जरिए सरकारी बॉन्ड में निवेश की इजाजत मिले
गोल्डनपीआई के को-फाउंडर अभिजीत रॉय ने कहा कि रिटेल इनवेस्टर्स को ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म के जरिए सरकार बॉन्ड्स में निवेश के लिए अप्लाई करने की इजाजत मिलनी चाहिए। साथ ही उन्हें आरबीआई के रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म के जरिए भी निवेश करने की इजाजत मिलनी चाहिए। ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म का मतलब ऐसी कंपनियों से है जो बॉन्ड या नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCD) निवेशकों खासकर रिटेल निवेशकों को बेचते हैं। ये निवेशकों को अपनी वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए निवेश करने की सुविधा देते हैं।
फाइनेंस बिल 2023 में इंटरेस्ट पर टीडीएस छूट खत्म की गई
ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स के एसोसिएशन में करीब 16-18 बॉन्ड्स पोर्टल शामिल हैं। इनमें IndiaBonds, GoldenPi, The Fixed Income, Winth Wealth, BondsKart, BondsIndia, Bond Bazar, Grip Invest और Aspero शामिल हैं। फाइनेंस बिल 2023 में सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 193 के क्लॉज (IX) को हटाने का एलान किया था। इस सेक्शन के तहत लिस्टेड बॉन्ड्स के इंटरेस्ट को टीडीएस से छूट मिली हुई थी।
ऐसे लगता है बॉन्ड्स के इंटरेस्ट पर टीडीएस
Wint Wealth के को-फाउंडर अंशुल गुप्ता ने कहा कि इसका मतलब यह है कि अगर बॉन्ड पर हर 12 महीने पर इंटरेस्ट का पेमेंट होता है और आप 11 महीने बाद बॉन्ड खरीदते हैं तो आपको इंटरेस्ट भले ही एक महीने का मिलेगा लेकिन TDS 12 महीने के लिए डिडक्ट होगा। इसका सीधा असर सेकेंडरी मार्केट्स में बॉन्ड्स की ट्रेडिंग पर पड़ा है। इस वजह से लिस्टेड बॉन्ड्स में निवेशकों के रिटर्न पर असर पड़ा है।
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बॉन्ड्स में निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट मिले
द फिक्स्ड इनकम डॉट कॉम के फाउंडर तीरथ शाह ने कहा कि सरकार को बॉन्ड्स में रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए बॉन्ड्स में निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन देने का ऐलान करना चाहिए। उधर, ग्रिप इनवेस्ट के फाउंडर एंड सीईओ निखिल अग्रवाल ने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां टैक्स के नियमों में बदलाव करने से बॉन्ड और फिक्स्ड इनकम मार्केट को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।