बजट के बाद 12 घंटे करनी होगी नौकरी! हफ्ते में 3 दिन मिलेगी छुट्टी लेकिन घट जाएगी हाथ आने वाली सैलरी

Budget 2024: भारत का अंतरिम बजट 2024 पेश होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं। देश के प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को लेकर कई उम्मीदें है। क्या सरकार नए लेबर कानून लागू करने को लेकर कोई अपडेट बजट में देगी। सरकार काफी समय से नए लेबर कानून लागू करने पर विचार कर रही है लेकिन ऐसा नहीं कर पाई है

अपडेटेड Feb 01, 2024 पर 8:00 AM
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Budget 2024: भारत का अंतरिम बजट 2024 पेश होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं।

Budget 2024: भारत का अंतरिम बजट 2024 पेश होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं। देश के प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को लेकर कई उम्मीदें है। क्या सरकार नए लेबर कानून लागू करने को लेकर कोई अपडेट बजट में देगी। सरकार काफी समय से नए लेबर कानून लागू करने पर विचार कर रही है लेकिन ऐसा नहीं कर पाई है। अगर लेबर कानून (Labour Law) देश में लागू होते हैं तो आपके ऑफिस के काम के घंटे, छुट्टी और हाथ आने वाली सैलरी बदल सकती है।

लेबर कानून आने से होंगे ये बदलाव

लेबर कानून लागू होने से कर्मचारियों के ऑफिस के काम के घंटे 12 घंटे तक हो सकते हैं लेकिन हफ्ते में 2 की जगह 3 दिन छुट्टी मिलेगी। साथ ही हाथ में आने वाला कैश घट सकता है लेकिन पीएफ बढ़ सकता है। मोदी सरकार की योजना जल्द से जल्द लेबर कानून के नियमों को लागू करने की है। कंपनियों के पास अधिकार होगा कि वह काम के घंटों को बढ़ाकर 12 घंटे कर सकती है लेकिन फिर एक दिन छुट्टी अधिक मिलेगी। यानी 3 दिन कर्मचारियों को छुट्टी मिल सकेगी।


कम हो सकती है हाथ आने वाली सैलरी लेकिन बढ़ जाएगा PF

आपकी बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50% या अधिक होगी। इससे ज्यादातर कर्मचारियों के वेतन का स्ट्रक्चर बदल जाएगा, बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी का पैसा ज्यादा पहले से ज्यादा कटेगा। पीएफ बेसिक सैलरी के आधार पर मिलेगा। पीएफ बढ़ने से हाथ आने वाली सैलरी कम हो जाएगी लेकिन रिटायरमेंट पर मिलने वाला पीएफ बढ़ जाएगा।

क्या हैं लेबर कानून – 4 कोड में बंटा है कानून

भारत में 29 सेंट्रल लेबर कानून को 4 कोड में बांटा गया है। कोड के नियमों में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और व्यवसाय सुरक्षा (Occupation Safety) और स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति आदि जैसे 4 लेबर कोड शामिल है। अभी तक 23 राज्यों ने इन ड्राफ्ट कानूनों को तैयार कर लिया है। संसद द्वारा इन चार संहिताओं को पारित किया जा चुका है, लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन संहिताओं, नियमों को अधिसूचित करना जरूरी है। उसके बाद ही ये नियम पूरे देश और राज्यों में लागू हो पाएंगे।

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