यूनियन बजट पेश होने में करीब दो हफ्ते का समय रह गया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। यह फाइनेंशियल ईयर 2024-25 का फुल बजट होगा। इस साल 1 फरवरी को उन्होंने अंतरिम बजट पेश किया था। इस बजट से सबसे ज्यादा उम्मीद टैक्सपेयर्स को है। उम्मीद है कि वित्तमंत्री इनकम टैक्स की नई रीजीम और पुरानी रीजीम के टैक्सपेयर्स के लिए बजट में बड़ी राहत देंगी। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
नई रीजीम का बढ़ेगा अट्रैक्शन
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम (Income Tax new Regime) का ऐलान किया था। इसका मकसद ऐसे लोगों पर टैक्स का कम बोझ डालना है जो किसी तरह की टैक्स-सेविंग्स नहीं करते हैं। पिछले साल के बजट में वित्तमंत्री ने नई रीजीम का अट्रैक्शन बढ़ाने के लिए कई ऐलान किए थे। इसकी वजह यह है कि शुरुआत के कई साल बीत जाने के बाद भी नई रीजीम का इस्तेमाल करने में टैक्सपेयर्स ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। उम्मीद है कि इस बार भी बजट में वित्तमंत्री नई रीजीम के लिए कुछ बड़े ऐलान करेंगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को कम से कम टर्म लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन की इजाजत मिल सकती है। इसकी वजह यह है कि ये दोनों इनवेस्टमेंट की कैटेगरी में नहीं आते हैं। आज टर्म लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो गया है। इसलिए नई रीजीम के टैक्सपेयर्स को दोनों पर डिडक्शन की इजाजत मिलनी चाहिए। इससे हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस खरीदने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। बीमा रेगुलेटर IRDAI ने 2047 तक हर व्यक्ति को इंश्योरेंस पॉलिसी उपलब्ध कराने का टारगेट तय किया है।
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पुरानी रीजीम में टैक्स का बोझ घटेगा
इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में टैक्स के रेट में कमी करने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी 10 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। यह बहुत ज्यादा है। इसका मतलब है कि हर महीने 90-95 हजार रुपये टैक्सेबल इनकम वाले व्यक्ति को हर महीने 27,000 रुपये टैक्स में चला जाता है। पिछले कुछ सालों में जिस तरह से महंगाई बढ़ी है, उसे देखते हुए मिडिल क्लास पहले से ही परेशान है। ऐसे में टैक्स का यह बोझ उसके लिए बहुत ज्यादा है। प्रमुख उद्योग चैंबर्स ने भी वित्तमंत्री को मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ घटाने की सलाह दी है।
इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम