बजट में 90,000 रुपये होगा स्टैंडर्ड डिडक्शन! सभी टैक्सपेयर्स को मोदी सरकार देगी तोहफा

Budget 2024: भारत का अंतरिम बजट 2024 पेश होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं। देश के टैक्सपेयर्स को मोदी सरकार के बजट से कई उम्मीदें हैं। उन्हें अब कुछ ही पलों में पता चल जाएगा कि उन्हें टैक्स मे थोड़ी और छूट मिलेगी या नहीं? टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स बचाने का सबसे आसान तरीका स्टैंडर्ड डिडक्शन है

अपडेटेड Feb 01, 2024 पर 11:14 AM
Budget 2024: देश के टैक्सपेयर्स को मोदी सरकार के बजट से कई उम्मीदें हैं।

Budget 2024: भारत का अंतरिम बजट 2024 पेश होने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं। देश के टैक्सपेयर्स को मोदी सरकार के बजट से कई उम्मीदें हैं। उन्हें अब कुछ ही पलों में पता चल जाएगा कि उन्हें टैक्स मे थोड़ी और छूट मिलेगी या नहीं? टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स बचाने का सबसे आसान तरीका स्टैंडर्ड डिडक्शन है। क्या सरकार इस बार नए और पुराने टैक्स रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाएगी? ये सपना अभी देश के सभी टैक्सपेयर्स देख रहे हैं। क्या वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये बढ़ाकर 90,000 रुपये करेगी?

सरकार बढ़ाएगी स्टैंडर्ड डिडक्शन?

अभी देश में स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 50,000 रुपये नए और पुराने टैक्स रीजीम में मिल रहा है। अगर सूत्रों की माने तो सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की इस लिमिट को बढ़ाकर 90,000 रुपये कर सकती है। यानी, सरकार अंतरिम बजट में इस लिमिट को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 90,000 रुपये करने का ऐलान कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो ये टैक्सपेयर्स के लिए पैसा बचाने के लिए बड़ी सेविंग साबित हो सकती है। ये बजट चुनावों से पहले पेश होने चुनावी बजट है, तो इसके लोकलुभावन होने के आसार हैं।


क्या होता है स्टैंडर्ड डिडक्शन?

स्टैंडर्ड डिडक्शन एक फ्लैट कटौती है, सैलरी क्लास टैक्सेबल इनकम में से बिना किसी खर्च या सेविंग दिखाए बिना छूट पा सकता है। इसका उद्देश्य उन टैक्सपेयर्स के बीच समानता हासिल करना है जो वेतन के माध्यम से इनकम और कारोबार से इनकम पाते हैं। पिछले साल सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को नए टैक्स रीजीम के साथ भी जोड़ दिया। अभी स्टैंडर्ड डिडक्शन पुराने टैक्स रीजीम और नए टैक्स रीजीम दोनों में मिल रही है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन का इतिहास

स्टैंडर्ड डिडक्शन पहली बार भारत में 1974 में पेश किया गया। स्टैंडर्ड डिडक्शन के इतिहास के मुताबिक यह कटौती सैलरी क्लास और पेंशनर्स को उनके खर्चों की भरपाई के लिए दिया जाता है। इसे 2004-2005 में टैक्स को आसान बनाने के लिए हटा दिया। इसे फिर 2018 में केंद्रीय बजट में फिर से पेश किया गया और सैलरी क्लास कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 40,000 रुपये तय किया गया। 1 फरवरी 2019 को पेश अंतरिम बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई। हालांकि, यह पुराने टैक्स सिस्टम तक ही सीमित था। बजट 2023 में इसे नए टैक्स रीजीम के साथ जोड़ दिया गया। नए टैक्स रीजीम में 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन की इजाजत दी गई। अब ये नए और पुराने दोनों टैक्स रीजीम पर मिलता है।

BLS E-Services IPO : दूसरे दिन तक 42 गुना भरा इश्यू, रिटेल निवेशकों ने जमकर किया है निवेश

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।