Budget 2024: आखिर सरकार को हर साल बजट की क्यों जरूरत पड़ती हैं?

Union Budget 2024: बजट का सरकार के कामकाज में बड़ा रोल है। इसमें एक वित्त वर्ष के दौरान सरकार के कुल रेवेन्यू और कुल खर्च का अनुमान होता है। आम तौर पर यूनियन बजट 1 अप्रैल से लेकर 31 मार्च तक के लिए होता है

अपडेटेड Jul 04, 2024 पर 1:53 PM
Budget 2024: इस साल लोकसभा चुनावों की वजह से सरकार को दो बार बजट तैयार करना पड़ा है।

इस बार वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट से कई उम्मीदें हैं। यूनियन बजट जुलाई के तीसरे हफ्ते में आ सकता है। केंद्र की नई एनडीए सरकार पर सबकी नजरें लगी हैं। इससे नई सरकार की पॉलिसी के बारे में संकेत मिलेंगे। वित्तमंत्री ने जून में बजट-पूर्व मीटिंग्स शुरू कर दी थी। उन्होंने इकोनॉमिस्ट्स, उद्योग चैंबर्स, इनवेस्टर्स, स्टॉक मार्केट सहित इकोनॉमी के करीब हर सेक्टर के प्रतिनिधियों से मिलकर बजट के बारे में उनकी राय जानने की कोशिश की। इसका मकसद ऐसा बजट तैयार करना था, जो सभी वर्गों की उम्मीदें पूरी कर सके। आखिर सरकार के लिए बजट क्यों जरूरी है?

सरकार के कामकाज में बजट का बड़ा रोल

बजट (Budget 2024) का सरकार के कामकाज में बड़ा रोल है। इसमें एक वित्त वर्ष के दौरान सरकार के कुल रेवेन्यू और कुल खर्च का अनुमान होता है। आम तौर पर यूनियन बजट (Union Budget) 1 अप्रैल से लेकर 31 मार्च तक के लिए होता है। इसका मतलब है कि इसमें सिर्फ एक साल के रेवेन्यू और एक्सपेंडिचर का अनुमान होता है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश करेंगी। इसकी वजह यह है कि इस साल लोकसभा चुनावों की वजह से सरकार ने 1 फरवरी, 2024 को फुल बजट पेश किया था।


अच्छे बजट के लिए बजट प्लान जरूरी है

फाइनेंस मिनिस्ट्री हर साल बजट से पहले पिछले सालों के सरकार के रेवेन्यू, खर्च, कर्ज, टैक्स पॉलिसी आदि का विश्लेषण करती है। वह आम लोगों की जरूरतों को भी समझने की कोशिश करती है। यह प्रक्रिया बजट पेश होने से करीब 6 महीने पहले शुरू हो जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके लिए एक अच्छा बजट प्लान बहुत जरूरी है। यह बजट प्लान ऐसा होना चाहिए, जिसमें इकोनॉमी की जरूरत पूरी करने के साथ ही समाज के सभी वर्गों की जरूरत पर नजर होनी चाहिए।

फाइनेंस मिनिस्ट्री हर मंत्रालय से इंफॉर्मेशन मांगती है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट तैयार करने की प्रक्रिया की शुरुआत में फाइनेंस मिनिस्ट्री के अधिकारी सबसे पहले नीति आयोग के अधिकारियों से मिलते हैं। इससे बजट की दिशा तय करने में मदद मिलती है। उसके बाद फाइनेंस मिनिस्ट्री अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों से डेटा मंगाती है। सभी डेटा का वित्तमंत्रालय में विश्लेषण होता है। इसके बाद बजट का खाका तैयार होता है।

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इस साल सरकार दो बार तैयार हुआ बजट

इस साल लोकसभा चुनावों की वजह से सरकार को दो बार बजट तैयार करना पड़ा है। हालांकि, अंतरिम बजट में सरकार ने खासकर इनकम टैक्स को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया था। लेकिन, अलग-अलग मंत्रालयों की जरूरतों को देखते हुए हर मंत्रालय के लिए आवंटन किया गया था। आम तौर पर माना जाता है कि अंतरिम बजट के बेसिक एप्रोच का इस्तेमाल सरकार फुल बजट में करती है।

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