Budget 2024: क्या निर्मला सीतारमण कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव करेंगी?

कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव की मांग हर साल बजट से पहले होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी अलग-अलग एसेट्स का होल्डिंग पीरियड अलग-अलग है। इसके अलावा टैक्स के रेट्स में भी अंतर है

अपडेटेड Jun 29, 2024 पर 4:28 PM
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सरकार ने फाइनेंस एक्ट 2023 में म्यूचुअल फंड की डेट स्कीमों के कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव किया था।

हर साल बजट पेश होने से पहले कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव की मांग होती है। एक्सपर्ट्स कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इंडिया में अलग-अलग एसेट्स पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के रेट-रेट अलग है। इसके अलावा एसेट्स के होल्डिंग पीरियड में भी अंतर है। इसके बावजूद सरकार ने कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव नहीं किया है। सवाल है कि क्या इस बार वित्तमंत्री लंबे समय से चली आ रही इस मांग को पूरा करेंगी?

शेयर और म्यूचुअल फंड्स

लिस्टेड कंपनी के स्टॉक्स या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स को एक साल से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। इसका रेट 15 फीसदी है। यह रेट तब लगता है जब सिक्योरिटीज के ट्रांसफर के वक्त सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) चुकाया गया हो। इन्हें 1 साल के बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स (Long term Capital Gains tax) लागू होता है। एक वित्त वर्ष में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस एक लाख रुपये से ज्यादा होने पर 10 फीसदी टैक्स लगता है।

अनलिस्टेड कंपनी के शेयर के मामले में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस के लिए होल्डिंग पीरियड 24 महीने है। इस पर टैक्स का रेट टैक्सपेयर्स के स्लैब के हिसाब से होता है। इसके लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के लिए होल्डिंग पीरियड 24 महीने से ज्यादा है। इस पर टैक्स का रेट 20 फीसदी है।


डेट इंस्ट्रूमेंट्स

सरकार ने फाइनेंस एक्ट 2023 में म्यूचुअल फंड की डेट स्कीमों के कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव किया था। नए नियम के मुताबिक, म्यूचुअल फंड्स की डेट स्कीमों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के नियम लागू नहीं होंगे। साथ ही इंडेक्सेशन का फायदा भी नहीं मिलेगा। इसका मतलब है कि अगर आप डेट म्यूचुअल फंड स्कीम की यूनिट्स बेचते हैं तो उससे मिले पैसे को आपकी इनकम में जोड़ दिया जाएगा। फिर आपके इनमक टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगेगा।

रियल एस्टेट्स

अगर किसी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को दो साल के अंदर बेच दिया जाता है तो उससे होने वाले प्रॉफिट को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। अगर उसे 2 साल के बाद बेचा जाता है तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। अचल संपत्ति को बेचने पर कैपिटल गैंस के कैलकुलेशन में प्रॉपर्टी की खरीद कीमत बहुत मायने रखती है। प्रॉपर्टी को बेचने से हुए शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस को आपकी इनकम में जोड़ दिया जाता है। फिर उस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी रेट से टैक्स लगता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अलग-अलग एसेट्स की होल्डिंग पीरियड और टैक्स के रेट्स अलग-अलग होने से निवेशकों को काफी उलझन होती है। सरकार को इस कमी को दूर करने की जरूरत है। हर साल बजट से पहले इंडस्ट्रीज, मार्केट और इनवेस्टर्स के प्रतिनिधि सरकार को कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव की सलाह देते हैं। लेकिन, अब तक सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया है।

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