भारत में बजट ने लंबा सफर तय किया है। आजादी के बाद पहला बजट 1947 में पेश हुआ था। तब से करीब 77 साल बीत चुके हैं। इस दौरान बजट में कई नई चीजें शामिल हुई हैं। कई चीजें हमेशा के लिए बजट से बाहर हो चुकी हैं। हम आपको इनकम टैक्स के ऐसे प्रावधान के बारे में बता रहे हैं, जिस पर आपको यकीन नहीं होगा। देश में सरकार ने विवाहित और अविवाहित लोगों के लिए अलग-अलग टैक्स के नियम पेश किए थे। ऐसा 1955-56 के यूनियन बजट में हुआ था। तब वित्तमंत्री सीडी देशमुख ने विवाहत और अविवाहित टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग टैक्स एग्जेम्प्ट स्लैब पेश किया था। फैमिली अलाउन्स के लिए सही स्कीम पेश करने के लिए ऐसा किया गया था।
योजना आयोग की सिफारिश पर हुआ था फैसला
साल 1955-56 के यूनियन बजट (Union Budget) में देशमुख ने विवाहित लोगों के लिए 1,500 रुपये का मौजूदा टैक्स एक्जेम्प्शन स्लैब बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का ऐलान किया था। अविवाहितों के लिए इसे घटाकर 1,000 रुपये करने की घोषणा की गई थी। योजना आयोग की सिफारिशों के आधार पर यह कदम उठाया गया था। 1950 के दशक में वेल्थ टैक्स (Wealth Tax) की शुरुआत की गई थी। इसी के साथ इनकम टैक्स पर अधिकतम दरों को पांच आने (30 पैसे) से घटाकर चार आना (25 पैसे) किया गया था।
1955-56 में देशमुख ने यह प्रस्ताव पेश किया था:
-0 से 2,000 रुपये टैक्स स्लैब - देय: कोई इनकम टैक्स देय नहीं
-2,001 रुपये से 5,000 रुपये टैक्स स्लैब - देय इनकम टैक्स रेट: रुपये में नौ पाई
- 5,001 रुपये से 7,500 रुपये टैक्स स्लैब - देय इनकम टैक्स रेट: रुपये में एक आना और नौ पाई
- 7,501 रुपये से 10,000 रुपये टैक्स स्लैब - देय इनकम टैक्स रेट: रुपये में दो आना और तीन पाई
- 10,001 रुपये से 15,000 रुपये टैक्स स्लैब - देय इनकम टैक्स रेट: रुपये में तीन आना और तीन पाई
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अविवाहितों के लिए इनकम टैक्स स्लैब
- 0 से 1,000 रुपये- देय इनकम टैक्स रेट: कोई इनकम टैक्स नहीं
- 1,001 रुपये से 5,000 रुपये – देय इनकम टैक्स रेट: रुपये में नौ पाई
- 5,001 रुपये से 7,500 रुपये - देय इनकम टैक्स रेट: रुपये में एक आना और नौ पाई
- 7,501 रुपये से 10,000 रुपये - देय इनकम टैक्स रेट: रुपये में दो आना और तीन पाई