Budget 2023: नेशनल इलेक्शन के पहले आने वाले आखिरी पूर्ण बजट में टैक्स दरों में कटौती, सामाजिक सुरक्षा छतरी के विस्तार और देश में प्रोडक्शन बढ़ाने के प्रयासों में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है। ऐसे में 1 फरवरी को आने वाले यूनियन बजट में फिस्कल कंसोलीडेशन के साथ ग्रोथ बनाए रखने के लिए सरकार क्या कवायद करती है, इस पर नजरें बनी रहेंगी। लोकल मीडिया में आई रिपोर्टस और तमाम अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन देश के मिडिल क्लॉस को राहत देने के लिए इनकम टैक्स स्लैब में कटौती कर सकती है। इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार जैसे प्रोग्राम के जरिए गरीबों पर होने वाले खर्च को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा इस बजट में लोकल मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ाव देने पर भी फोकस देखने को मिल सकता है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings & Research) के अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने लोगों खर्च करने की शक्ति को कम कर दिया है ऐसे में वित्तमंत्री की तरफ से मिलने वाली कोई कर राहत "उपभोग की मांग को सपोर्ट करती दिख सकती है।" उन्होंने आगे कहा कि देश में गरीबों और अमीरों के बीच बढ़ते अंतर को देखते हुए इस बजट में कल्याणकारी योजनाओं पर आबंटन बढ़ता दिख सकता है।
आम चुनाव के पहले का मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट ऐसे समय में आ रहा है जब दुनियाभर में ब्याज दरों में बढ़त देखने को मिल रही है और ग्लोबल ग्रोथ धीमी पड़ रही है। ऐसे में सरकार के पास बहुत ज्यादा लोकलुभावन ऐलान करने की छूट नहीं है। इस मुद्दे पर ब्लूमबर्ग की तरफ से करवाए गए एक सर्वे से निकल कर आया है कि वित्तीय घाटा इस साल के 6.4 फीसदी से घटकर 5.9 फीसदी पर रह सकता है। इसके चलते में हमें एक और साल सरकार की तरफ से रिकॉर्ड उधारी देखने को मिल सकती है।
एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में निवेशकों के लिए क्या रहता है, इस पर कल बाजार की नजर रहेगी। अरबपति उद्यमी गौतम अडानी के कारोबारी समूह पर अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग की तीखी रिपोर्ट ने भी देश को सुर्खियों में ला दिया है। ये मुद्दा संसद के बजट सत्र में भी गूंज सकता है।
बजट में यहां रह सकता है फोकस
कर में कटौती
वित्त मंत्री ने हाल ही में कहा था कि उनको इस बात का एहसास है कि मिडिल क्लॉस किस दबाव में चल रहा है। ऐसे में इस बात की अटकलें लगाईं जा रही हैं कि वित्तमंत्री इस बार के बजट में करदाताओं की जेब में कुछ ज्यादा पैसे छोड़ सकती हैं। ये सब कुछ मुफ्त में नहीं हासिल होने वाला है। इंद्रनील पैन के नेतृत्व वाले यस बैंक के अर्थशास्त्रियों के पैनल का कहना है कि अगले साल की कर वसूली में 15 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है। उन्होंने आगे कि अगर निचले आय वर्ग के टैक्स दरों में कोई कमी की जाती है तो इसकी भरपाई ऊपरी आय वर्ग के लिए उपकर / अधिभार बढ़ाकर की जाएगी।" Economic Times की एक रिपोर्ट को मुताबिक घरेलू मैन्यूफैक्तरिंग को बढ़ावा देने को लिए वित्तमंत्री प्राइवेट जेट,हेलीकॉप्टर,हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स और ज्वेलरी पर लगने वाले इम्पोर्ट ड्यूटी में बढ़त देखने को मिल सकती है।
सोशल सेक्टर पर रह सकता है फोकस
सामाजिक क्षेत्र
भारत की बेरोजगारी दर पिछले महीने 16 महीने के उच्च स्तर (8.3%) पर पहुंच गई। ऐसे दुनिया की सबसे बड़ी आबादी के लिए रोजगार पैदा करना सरकार के लिए इस बजट की सबसे बड़ी चुनौती है। डीबीएस समूह की अर्थशास्त्री राधिका राव का कहना है कि इस बजट में ग्रामीण रोजगार गारंटी पर होने वाला आबंटन इस साल के 730 अरब रुपये (9 अरब डॉलर) के आबंटन से ज्यादा रह सकता है। इसके साथ ही फसल बीमा, ग्रामीण सड़क बुनियादी ढांचे और किफायती घरो पर भी वित्त मंत्री का फोकल रह सकता है।
ऑक्सफैम इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 21 सबसे धनी अरबपतियों के पास 700 मिलियन भारतीयों से अधिक संपत्ति है। ये देश में आय में भारी असमानता दिखाता। भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष का कहना है कि इस बजट में बुजुर्गों और बच्चियों के लिए छोटी बचत योजनाओं के दायरे को बढ़ाया जा सकता है।
मैन्यूफैक्चरिंग पर रह सकता है फोकस
भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन का विकल्प बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में मैन्यूफैक्चरर देश में अपनी फैक्ट्रियां लगाने के लिए सरकार से वित्तीय राहत या सहायता की उम्मीद कर रहे हैं। इस बजट में हमें शिपिंग कंटेनर और खिलौना बनाने वाले सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम आती दिख सकती है। एस बैंक के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस बजट में आउटपुट लिंक्ड बेनीफिट के जरिए उत्पादन गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा देने पर फोकस किया जा सकता है।
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