भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने सोमवार 26 सितंबर को उन विपक्षी दलों पर निशाना साधा, जो गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सिस्टम का विरोध और आलोचना कर रहे हैं।

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने सोमवार 26 सितंबर को उन विपक्षी दलों पर निशाना साधा, जो गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सिस्टम का विरोध और आलोचना कर रहे हैं।
सीतारमण ने हमारे सहयोगी न्यूज चैनल News18 के कार्यक्रम में कहा, "संस्थाओं को बनाने में समय लगता है... उन्हें बर्बाद करना आसान है।" वित्त मंत्री ने कहा, "हमसें से जरूर कुछ के पास काफी धैर्य और सयंम होगा, वहीं कुछ के पास ऐसा नहीं होगा... लेकिन संस्थाओं को काफी धैर्य की जरूरत होती है।"
भारत ने जुलाई 2017 में 'एक देश, एक टैक्स के नजरिए' के साथ GST को अपनाया था। यह एक इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम है। 2017 में जीएसटी की शुरुआत के समय, राज्यों को रेवेन्यू के नुकसान के बदले में 5 साल तक के लिए मुआवजे का संवैधानिक प्रावधान किया था। जीएसटी कंपनेसेशन टू स्टेट्स एक्ट (GST Compensation to States Act) के तहत राज्यों को हर साल 14 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी के साथ मुआवजा दिया जाता है।
जीएसटी मुआवजे की यह व्यवस्था इस साल 30 जून को खत्म हो गई, जिसके बाद कई राज्य इसे आगे भी जारी रखने की मांग कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर अपना रुख साफ नहीं किया है।
कुछ राज्यों के वित्त मंत्रियों, विशेष रूप से तमिलनाडु के पलानीवेल थियागा राजन (PTR) ने सुझाव दिया है कि टैक्स सिस्टम में बदलाव की जरूरत है। PTR ने कहा है कि अगर जीएसटी काउंसिल वास्तव में एक फेडरल संस्था है, तो उसे यह तय करना होगा कि क्या राज्यों को राजस्व की कमी के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए या नहीं। थियागा राजन ने इसके अलावा जीएसटी की व्यापक समीक्षा की भी जरूरत बताई।
जीएसटी काउंसिल की आखिरी बैठक जून महीने के अंत में हुई थी। इसके बाद अगली बैठक अगस्त के शुरुआत में होनी थी, लेकिन अभी तक यह बैठक हो नहीं पाई है।
सीतारमण ने कहा कि जीएसटी काउंसिल का गठन राज्यों के वित्त मंत्रियों के एक पैनल ने किया था, जिसकी अध्यक्षता पश्चिम बंगाल के असीम दासगुप्ता ने किया था, जो एक विपक्षी दल के नेता थे।
यह पूछे जाने पर कि क्या लगातार वित्त आयोगों की तरफ परिभाषित पैसों के आवंटन में दक्षिण भारत के राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, वित्त मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को एक हद तक संबोधित किया गया था। हालांकि फिर उन्होंने कहा, "अगर हम लगातार इस तरह की कृत्रिम रेखा खींचेंगे तो क्या कोई देश समृद्ध बनेगा?
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