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CAG का बड़ा खुलासा! बैंक और NBFCs ने बिना PAN और फर्जी एंट्री से किया ₹40,178 करोड़ का टैक्स क्लेम

CAG Report On Tax Relief: आयकर अधिनियम की धारा 139A और नियम 114B के तहत वित्तीय लेनदेन के लिए PAN साझा करना अनिवार्य है। ऑडिट में पाया गया कि असेसिंग ऑफिसर्स ने डेटा का वेरीफिकेशन नहीं किया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है

Edited By: Abhishek Guptaअपडेटेड Apr 06, 2026 पर 1:01 PM
CAG का बड़ा खुलासा! बैंक और NBFCs ने बिना PAN और फर्जी एंट्री से किया ₹40,178 करोड़ का टैक्स क्लेम
CAG ने अपनी रिपोर्ट में कुछ ऐसे उदाहरण दिए है जो सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करते हैं

CAG Report: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक लेटेस्ट ऑडिट रिपोर्ट ने बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) ने कर्जदारों के PAN डिटेल्स साझा किए बिना ही करोड़ों रुपये के 'Bad Debts' यानी 'बुरे लोन' पर टैक्स छूट का लाभ उठा लिया। आयकर विभाग की ढिलाई के कारण करीब ₹40,178 करोड़ की टैक्स राहत संदेह के घेरे में आ गई है।

क्या है पूरा मामला?

नियमों के मुताबिक, जब कोई बैंक किसी कर्ज को 'बेड डेट' मानकर अपने बही-खातों से हटाता है, तो वह उस राशि पर टैक्स कटौती का दावा कर सकता है। लेकिन इसके लिए कर्जदार की सही जानकारी देना अनिवार्य है। CAG ने इसी टैक्स राहत को लेकर 28 बैंकों और 99 NBFCs के रिकॉर्ड की जांच की। जांच में पाया गया कि कुल ₹1,37,320 करोड़ के बेड डेट दावों में से ₹64,696 करोड़ के कर्ज ऐसे लोगों को दिए गए थे जिनके PAN के डिटेल्स इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दिए ही नहीं गए थे। सबसे दिलचस्प बात तो ये रही कि इन कमियों के बावजूद, आयकर विभाग ने असेसमेंट के दौरान ₹40,178 करोड़ की भारी-भरकम कटौती की अनुमति दे दी।

फर्जी PAN और वेरिफिकेशन की कमी

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